086/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
एक एकम एक।
हम बनें नेक।।
एक दूनी दो।
पड़ा मत सो।।
दो दूने चार।
छोड़ दे खुमार।।
तीन दूनी छह।
यों ही मत बह।।
चार दूनी आठ।
याद कर पाठ।।
पाँच दूनी दस।
अभी नहीं बस।।
छह दूनी बारह।
सचाई का पथ गह।।
सात दूनी चौदह।
अत्याचार मत सह।।
आठ दूनी सोलह।
करेंगे किलोलह।।
नौ दूनी अठारह।
गोपनीय मत कह।।
दस दूनी बीस।
जिएं सौ बरीस।।
शुभमस्तु,
10.02.2026◆3.15प०मा०
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