मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

कोयल कुहू- कुहू कर बोली [ बाल कविता ]

 085/2026


   

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


कोयल    कुहू- कुहू   कर   बोली।

उठो    बालको     आई      होली।।


फूल    खिले     हैं   क्यारी -क्यारी। 

रंग-बिरंगी          है          तैयारी।।


गेंदा      और     गुलाब     महकते।

जिन  पर तितली  भ्रमर  चहकते।।


जंगल- जंगल     दहकन      कैसी।

आग  लगी हो    वन     में   ऐसी।।


टेसू      लाल-लाल       हैं     फूले।

कीट - पतंगे     डालें           झूले।।


सरर-सरर     बह      रहीं    हवाएँ।

भरी  गलन में       धूप      तपाए।।


'शुभम्'  लगे  वसंत     ऋतु  आई।

चलती  शीतल     सद     पुरवाई।।


शुभमस्तु,


10.02.2026◆6.45आ०मा० 

                  ◆◆◆

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