रविवार, 20 अक्तूबर 2019

दिया नहीं तो पर्व क्या ! [ दोहे ]



दिया   नहीं   तो पर्व  क्या ,
मना   रहे       सब   लोग ।
दीपावलि    कहते    जिसे,
धन का ही  सुख -भोग।।1।

दिया  जले    मुखड़े  खिले,
तम  का    हुआ     विनाश।
महलों   की   महिमा  बड़ी ,
कुटिया  को   भी आश।।2।

दीपक   से    दीपक    जले,
बढ़ता     पुण्य  -    प्रकाश।
मानव    से    मानव    जले,
मिट  जाती  हर   आश।।3।

जलता     दीपक    देखकर,
 बँधी     बुझे     को   आश।
दीपक   से   ही    सीख  ले,
खाता   है  क्या    घास??4।

छज्जे   छत  छप्पर   सभी ,
हुए       प्रकाशित    आज।
घर -  घर  में   दीपक जले,
दीवाली     का    साज।।5।

खीलों -  सी   मुस्कान    है ,
भरी         बताशे      आश।
बाती    की     फैले    प्रभा ,
घर  - घर   भरे   उजास।।6।

झिलमिल    झालर   झूमती,
रंग     -   बिरंगी          ख़ूब।
बेलें     भी      हँसने    लगीं,
मुस्काती       है      दूब।।7।

 बतियाती   है     दीप  - लौ,
गुपचुप       करतीं     बात।
एक    वर्ष    में     एक  ही ,
आती   है   क्यों   रात!!8।

दीवाली    की      रात    में,
भूले        सब         संदेश।
'आतिशबाजी   मत  जला'-
का       देते      उपदेश।।9।

लगा    पलीता     सीख  में ,
फूँक         रहे        बारूद।
ज़हर    घोलते      वायु   में ,
करते     ऊधम    कूद।।10।

द्यूत      सुरा     सट्टा    तजें ,
दीवाली       शुभ        पर्व।
उर    से   उर   को दें मिला ,
'शुभम ' ज्योति का गर्व।।11।

💐शुभमस्तु !
✍रचयिता ©
🌾 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम '

www.hinddhanush.blogspot.in

20अक्टूबर 2019◆10.30 पूर्वाह्न

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