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©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
बिफ़र रही खिसियानी बिल्ली।
इधर-उधर मिमियानी बिल्ली।।
कभी इधर का खंभा नोचे।
कभी दूध को पलटे सोचे।।
अपने से उकतानी बिल्ली।
बिफ़र रही खिसियानी बिल्ली।।
साथ निभाती बहना प्यारी।
चढ़ती फाटक पर बेचारी।।
व्यर्थ यहाँ उलझानी बिल्ली।
बिफ़र रही खिसियानी बिल्ली।।
मौज मनाने इटली जाए।
किंतु लौट बुद्धू फिर आए।।
उछल कूद रपटानी बिल्ली।
बिफ़र रही खिसियानी बिल्ली।।
नहीं वचन का ठीक ठिकाना।
जो मन भाए गीत सुनाना।।
कुर्सी की भुखियानी बिल्ली।
बिफ़र रही खिसियानी बिल्ली।।
चली विदेशों में भड़काने।
अपनी चालें लगी चलाने।।
अपने मन भखियानी बिल्ली।
बिफ़र रही खिसियानी बिल्ली।।
शुभमस्तु,
07.10.2026 ◆12.15 प०मा०
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