344/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
पितर हमारे
आए हैं
शुचि कृपा करेंगे,
दिखलाते निज रूप
स्वप्न में
मौन धरें वे।
पितरों का आशीष
फला है
हम जीवन जीते
वही खोलते भाग्य
घटों को
जो थे रीते।
करें दुग्ध तिल
गंगाजल से
पितरों का तर्पण
उनके ही हम रूप
नेह निज करते अर्पण।
शुभता का संदेश
पितर अपनापन देते
करें महक से तृप्ति
नहीं कुछ हमसे लेते।
'शुभम्' पिता माँ
बाबा दादी पितर हमारे
हम उनकी संतान
सदा वे सहज सहारे।
शुभमस्तु,
08.10.2026 ◆ 5.00प०मा०
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