शनिवार, 30 जनवरी 2021

हमारा गणतंत्र पर्व: भारतीय होने का गर्व [ गीत ]


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✍️ शब्दकार ©

🇮🇳 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

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आया  है  गणतंत्र- पर्व  फिर,

भर    उत्साह    मनाना    है।

शंख एकता   का  धरती पर,

मिलकर   हमें    बजाना  है।।


भारतीय   होने   का  हमको,

गर्व     हमेशा   रहा,      रहे।

त्यागवीर   बलिदानी  गाथा ,

पल्लव -पल्लव  पुष्प  कहे।।

मिली   धरोहर   हमें  पुरानी ,

इसको   बचा ,  सजाना   है।

आया है गणतंत्र - पर्व  फिर,

भर   उत्साह    मनाना   है।।


संविधान     अंगीकृत   करके,

उसका       मान      बढ़ाएँगे।

हो  अखंड  मम  भारत माता,

माँ   का    कर्ज़     चुकाएंगे।।

धरती   की माटी   से हमको,

अन्न    बहुत    उपजाना   है।

आया  है  गणतंत्र- पर्व फिर,

भर    उत्साह    मनाना  है।।


लोकतंत्र   गणराज्य देश का,

पंथों    से      निरपेक्ष     रहे।

मानव, मानवता   के हित में,

सदा   नेह   की   सरित बहे।।

मानव की गरिमा, अखंडता,

का ध्वज   नित  फहराना है।

आया है  गणतंत्र -  पर्व फिर,

भर     उत्साह    मनाना  है।।


निज विचार,अभिव्यक्ति, धर्म के,

बनें   उपासक    भारतवासी।

मिले न्याय जन-जन को सच्चा,

मुख  पर  छाई  मिटे उदासी।।

बाल-  बालिका  में शिक्षा का ,

घर - घर   अलख  जगाना है।

आया  है गणतंत्र -   पर्व फिर,

भर    उत्साह     मनाना   है।।


अवसर की समता हो सबको,

भेदभाव     से     दूर       रहें।

'हम    हैं  भारतवासी    सारे,'

ताने    सीना    सभी    कहें।।

'शुभम' गर्व से  मस्तक ऊँचा,

हमको     सदा   उठाना    है।

आया  है गणतंत्र - पर्व  फिर,

भर   उत्साह     मनाना   है।।


💐 शभमस्तु !


२५.०१.२०२१◆११.००आरोहणम मार्त्तण्डस्य।

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