रविवार, 15 सितंबर 2019

ग़ज़ल


      

 हिंदी    है   मनभावन   गंगा,
 हिंदी   सुंदर   सावन   गंगा।

हिंदी  भाषा अजर- अमर है,
हिंदी  सदा सुहागन   गंगा।।

हिंदी   सबकी  पावन  वाणी,
संस्कारों   का  उपवन गंगा।।

एक    सूत्र    में  बाँधे  हिंदी,
ज्यों  बहती है  वन-वन गंगा।

मधुर  मातृभाषा   है  अपनी
सबको   देती   जीवन  गंगा।।

दीन - दुखी  इन्सां  की वाणी,
कल्याणी   मनभावन  गंगा।।

जन्मदात्री   प्रसविनि  माता!
'शुभम'  है  हिंदी पावन गंगा।

💐 शुभमस्तु !
✍रचयिता ©
🏵 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम

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