सोमवार, 27 अप्रैल 2026

सबको अपने लगें दुलारे [ गीतिका ]

 125/2026


  

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


सबको     अपने      लगें    दुलारे।

माँ    को     एकचक्षु    सुत प्यारे।।


होता   नहीं    बुरा - अच्छा    कुछ,

बस  निजत्व    ने   पाँव    पसारे।


लैला    न     थी      सुंदरी    नारी,

पर मजनू    की  दृग     की   तारे।


इस मन    को    भा  जाए जो भी,

दिखते   उसे    वहीं      उजियारे।


देख    अजनबी   भौंकें     कूकर,

बनें      पालतू      टरें     न   टारे।


अपनेपन    का   मोल    बड़ा   है,

अनभाए   सब      लगते     खारे।


'शुभम्' श्याम  से  प्रीति  लगा  ले,

खुलें  प्रेम   से     बंद       किवारे।


शुभमस्तु,

06.04.2026◆7.15 आ०मा०

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