सोमवार, 27 अप्रैल 2026

होता नहीं बुरा-अच्छा कुछ [ सजल ]

 124/2026



समांत          : आरे

पदांत           : अपदांत

मात्राभार      :16.

मात्रा पतन    :शून्य।


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


सबको      अपने      लगें    दुलारे।

माँ    को    एकचक्षु    सुत  प्यारे।।


होता   नहीं    बुरा - अच्छा    कुछ।

बस  निजत्व    ने   पाँव    पसारे।।


लैला    न     थी      सुंदरी    नारी।

पर मजनू    की  दृग     की   तारे।।


इस मन    को    भा  जाए जो भी।

दिखते   उसे    वहीं      उजियारे।।


देख    अजनबी   भौंकें     कूकर।

बनें      पालतू      टरें     न   टारे।।


अपनेपन    का   मोल    बड़ा   है।

अनभाए   सब       लगते     खारे।।


'शुभम्' श्याम  से  प्रीति  लगा  ले।

खुलें  प्रेम   से     बंद       किवारे।।


शुभमस्तु,

06.04.2026◆7.15 आ०मा०

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