सोमवार, 27 अप्रैल 2026

पकी फसल को काट [ गीत ]

 126/2026


            

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


पकी फसल को काट

मुदित मन

स्वप्न करे साकार।


रंग सुनहरा

बालें झूमी

पछुआ  हवा बहे 

देख फसल को

लड्डू फूटें

मन के ताप दहे

श्रम का फल

मिलने वाला है

भरें गेह आगार।


एक साल को

खाने भर को

होगा घर गोधूम

पीले हाथ करे

बिटिया के

रही सफलता चूम

भूसा  है

पशुओं का भोजन

बोरों में भर सार।


भरी दुपहरी में

किसान ने

सिर पर साफा साध

स्वेद बहाने को

निकला है

किया नहीं अपराध

है वैशाख 

वसंत माह में

मिला  कृषक -उपहार।


शुभमस्तु,


07.04.2026◆5.00 आ०मा०

                  ◆◆◆

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