135/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
सबके वश का नहीं होता
ले लेना लोहा
लोहा लेने के लिए
सामर्थ्य भी तो चाहिए
शक्ति भी होनी चाहिए।
रावण ने श्रीराम से
लोहा लिया
कंस ने श्रीकृष्ण से
लोहा लिया
आज श्रीराम के साथ
रावण का
श्रीकृष्ण के साथ
कंस का नाम भी
लिया जाता है।
महिषासुर ने
माँ दुर्गा से लोहा लिया
शुम्भ निशुम्भ ने
लोहा लिया,
चण्डमुण्ड
धूम्रलोचन और
रक्तबीज ने भी
लोहा लिया,
दुर्गा सप्तशती इसका
बखान करती है,
लोहा लेने वालों की
महिमा का भी
परोक्ष बयान करती है।
आज भी पुतिन से
जेलेन्सकी
अमेरिका और इसराइल से
ईरान
लोहा ले ही रहे हैं,
जो हो रहा है
सब देख रहे हैं,
इतिहास की
पुनरावृत्ति होती है,
हो ही रही है।
लोहा लेने
और देने का काम
कभी बंद नहीं हुआ,
सबके मूल में
एक ही तत्त्व अनुस्यूत है
वह है अहंकार,
जो कभी मरता नहीं है,
बस देश काल और
स्थान के अनुसार
रूप और पात्र बदलता है।
शुभमस्तु,
17.04.2026◆1.45 आ०मा०
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