सोमवार, 27 अप्रैल 2026

चिड़िया पाँच बजे जग जाती [ बालगीत ]

 140/2026



©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


चिड़िया   पाँच   बजे   जग  जाती।

नित्य    भोर   में    मुझे    उठाती।।


मुख्य    द्वार    पर     लटकीं  बेलें।

जिन पर   चिड़ा- चिड़ी नित खेलें।।

फुदक-फुदक    कर   गाना  गाती।

नित्य भोर     में     मुझे    उठाती।।


कहती   चिड़िया   आलस   छोड़ो।

लगन लगा   प्रभु   से मन   जोड़ो।।

पाठ    कर्म     का    मुझे  पढ़ाती।

नित्य  भोर    में    मुझे     उठाती।।


जिस दिन चिड़िया चोंच न खोले।

मुड़गेरी    पर   बैठ    न    बोले।।

मुझको    उसकी   याद  सताती।

नित्य  भोर   में    मुझे    उठाती।।


चांव - चांव     चूँ      करते    बच्चे।

लगते     कितने     भोले    सच्चे।।

उनको     दाना      चुगने     जाती।

नित्य    भोर     में    मुझे  उठाती।।


एक      घोंसला     उसका   प्यारा।

सघन  पल्लवों    में     है    न्यारा।।

'शुभम्' चिड़ा सँग नित चिचियाती।

नित्य    भोर    में   मुझे   उठाती।।


शुभमस्तु,


21.04.2026◆8.00 आ०मा०

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