सोमवार, 27 अप्रैल 2026

श्वान युगल मुझको अति भाता [ बालगीत ]

 141/2026




©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


श्वान युगल  मुझको  अति  भाता।

मुख्य   द्वार पर    लोट   लगाता।।


श्वान   साँवला   लता    कुंज   में।

विमुख   सदा वह  काक गुंज में।।

जो भी मिल  जाता    खा   जाता।

श्वान युगल मुझको   अति भाता।।


श्वानी     गौर    वर्ण     चितकबरी।

हर  आहट    की     लेती  खबरी।।

श्वान    साथ    में   तान   मिलाता।

श्वान युगल मुझको    अति भाता।।


नहीं    परिचितों      पर   वे   भूँकें।

नव    आगत पर     सस्वर   दूंकें।।

कभी - कभी    रद   दृश्य दिखाता।

श्वान युगल मुझको   अति  भाता।।


अनायास       शरणागत     आया।

मेरे घर   भर   को   अति    भाया।।

बना   हुआ   घर   भर   का  त्राता।

श्वान युगल  मुझको   अति भाता।।


जीव जगत    के   सब   हैं   प्यारे।

हैं  स्वभाव    भी    उनके    न्यारे।।

अद्भुत    उनमें      क्षमता    पाता।

श्वान  युगल मुझको   अति भाता।।


शुभमस्तु,


21.04.2026◆8.45 आ०मा०

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