सोमवार, 27 अप्रैल 2026

कर्मठ जीवन सदा जिया [ सजल ]

 137/2026


  

समांत           : इया

पदांत            : है

मात्राभार        :16.

मात्रा पतन      :शून्य


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


जिसने  जग   में   नाम   किया है ।

कर्मठ   जीवन   सदा   जिया  है।।


करता  है  नर   नष्ट    समय  को।

विष का  ही  वह   घूँट  पिया   है।।


विपदा  झेल   भटकता   वन - वन।

युगल ख्यात  वह   राम - सिया है।।


निशिदिन जल-अभिसिंचन करती।

कहलाती   जग    में    नदिया  है।।


घरनी  घर    को    रहे    समर्पित।

घर-घर   में  विख्यात   तिया   है।।


फल  लगते   ही   झुकते   तरुवर।

विनय भाव सिर    धार   लिया है।।


'शुभम्'  कर्म  है  बीज   योनि का।

जन्म-जन्म   महके    बगिया   है।।


शुभमस्तु,


20.04.2026◆6.15 आ०मा०

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