145/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
समांत : अट्टा
पदांत :अपदांत
मात्राभार :16
मात्रा पतन : शून्य
स्वाद आम का अतिशय खट्टा।
कीर ढूँढ़ता छट्टा-छट्टा।।
अमराई में आई गोरी।
भर आमों से लिया दुपट्टा।।
चला प्रभंजन रूख उखाड़े।
लगा आम का ऊँचा चट्टा।।
पत्थर मार तोड़ते अमियाँ।
बालक गँवई फेंकें गट्टा।।
करो न ओछे काम बालको।
लगे शान को किंचित बट्टा।।
सोच समझ कर खेल खेलना।
नहीं समझना जीवन ठट्टा।।
'शुभम्' दाँव पर लगे न जीवन।
नहीं मानना इसको सट्टा।।
शुभमस्तु,
27.04.2026◆9.00आ०मा०
◆◆◆
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें