136/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
इन्होंने लोहा दिया
उन्होंने लोहा लिया
सोना उछल कर
जाग उठा,
चाँदी चमक उठी
चहक उठी।
लोहा लेने वालों का
लोहा देने वालों से
परस्पर भौंकनीय
सम्बंध है,
कहीं न कहीं
सोने - चाँदी का
इनसे अनुबंध है।
लोहे से पिटता रहा
सोना
पिटती है चाँदी भी,
लोहे से विलग होकर
बेचारे
जाएँगे भी कहाँ!
लोहे से लोहे की
टकराहट
बढ़ती गई खटपट
जन हानि
धन हानि
राष्ट्रों की संपदा की हानि
और उधर सोना
जाग गया
चाँदी भी क्यों पीछे रहे।
लोहे से लोहे की
टकराहट
बढ़ाती है अशांति
दुनिया में अकुलाहट,
पता नहीं क्या हो !
न रही मानवता
न दया ही।
किस मोड़ पर
आकर खड़ी है दुनिया
क्या यही विनाश का
संकेत है,
नहीं जानता
कोई भी झुकना
इंसान ही
इंसान का
आखेट है।
शुभमस्तु,
17.04.2026◆9.00 आ०मा०
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