सोमवार, 27 अप्रैल 2026

जिसने जग में नाम किया है [ गीतिका ]

 138/2026


  

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


जिसने  जग   में   नाम   किया है ।

कर्मठ   जीवन   सदा   जिया  है।।


करता  है  नर   नष्ट    समय  को,

विष का  ही  वह   घूँट  पिया   है।


विपदा  झेल   भटकता   वन - वन,

युगल ख्यात  वह   राम - सिया है।


निशिदिन जल-अभिसिंचन करती,

कहलाती   जग    में    नदिया  है।


घरनी  घर    को    रहे    समर्पित,

घर-घर   में  विख्यात   तिया   है।


फल  लगते   ही   झुकते   तरुवर,

विनय भाव सिर    धार   लिया है।


'शुभम्'  कर्म  है  बीज   योनि का,

जन्म-जन्म   महके    बगिया   है।


शुभमस्तु,


20.04.2026◆6.15 आ०मा०

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