बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

शक्ति [ चौपाई ]

 349/2026


              


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


शक्ति       स्वरूपा        दुर्गा     माता।

'शुभम्' चरण में       निशिदिन   ध्याता।।

ब्रह्मचारिणी            शैल            सुपूती।

दैन्य   दुःख     दव    करतल         छूती।


नारी    शक्ति      रूप      जो     होती।

पावन    शुचिता      नर       में     खोती??

नारी   -   शक्ति          सहारा     चाहे।

बदले       राह       सड़क         चौराहे।।


शक्ति       बिना      अस्तित्व  नहीं     है।

हर    कागज   क्या   नोट    कहीं     है??

शक्ति   अलग      से      डाली       जाती।

बढ़ता       मोल         अमोल     कहाती।।


अश्वशक्ति       मानक       से       मापें।

दुर्बल    खड़े   शक्ति      से      काँपें।।

ट्रेनें     बस       ट्रक      मोटर      लारी।

बिना  शक्ति   इन   सबकी    ख्वारी।।


शक्ति हीन    की    पूछ    न     कोई।

शक्ति       बिना         मर्यादा     खोई।।

धन   विद्या    की    शक्ति    अनोखी।

जहाँ     मिले     कीमत  हो       चोखी।।


शक्ति      बाण       से    असुर   सँहारे।

लगे    राम      की       जय     के  नारे।।

जहाँ     शक्ति     है     जीत     वहीं  है।

सत्य     धर्म      की     कमी      नहीं    है।।


'शुभम्'     शक्ति   मत    जाया    करना।

असुर   वृत्ति   से     कभी    न    डरना।।

सदा      सत्य       का    साथ  निभाना।

धन    बल   विद्या    सब     अपनाना।।


शुभमस्तु,


12.10.2026◆ 10.30 आ०मा०

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