बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

चली भेड़ कुर्सी हथियाने [ गीत]

 346/2026

         

   


   ©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


चली    भेड़      कुर्सी   हथियाने।

लोकतंत्र   को    लगा   ठिकाने।।


झुंड    भेड़    का   एक   बनाया।

लालच दे   उसको    भड़काया।।

ऊलजलूल        मारती      ताने।

चली  भेड़       कुर्सी    हथियाने।


बिना  टिकट  ट्रेनों    पर    छाए।

टिड्डी  के   दल    ज्यों   मंडराए।।

नंगम   नंग   नाच      गा     गाने।

चली  भेड़    कुर्सी     हथियाने।।


मतचोरी - आरोप         सरासर।

जनमत का   कर   रहे  निरादर।।

कोई      नहीं     सुबूत     बताने।

चली  भेड़      कुर्सी   हथियाने।।


चित  भी    मेरी     पट   भी मेरी।

कहता    नहीं    सुनूँगा      तेरी।।

भेड़      चुगेंगीं       मेरे      दाने।

चली  भेड़     कुर्सी    हथियाने।।


जैसे  भी     हो     सत्ता    पाना।

लक्ष्य    नाक   से   चने चबाना।।

आग     लगाकर   नाग   बसाने।

चली    भेड़    कुर्सी   हथियाने।।


शुभमस्तु,


11.10.2026◆1.15 प०मा०


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