347/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
समांत : एने
पदांत : वाला
मात्राभार : 24.
मात्रा पतन : शून्य।
विरल वर्ण्य महनीय सदा है देने वाला।
याचक छोटा क्षुद्र क्षम्य है लेने वाला।।
दिनकर देता दिव्य ज्योति जगती को जी भर।
भरी नदी में त्राता नैया खेने वाला।।
मोल नहीं कम उस जननी का जो जनती है।
पूजनीय है वंद्य अंड को सेने वाला।।
अगणित हैं मिष्ठान्न धरा पर स्वाद अनोखे।
अनुपम कोमल श्वेत मधुरतम छेने वाला।।
'शुभम्' हवाई द्वीप लुप्तता की कगार पर।
दुर्लभ संज्ञा का मराल मृदु नेने वाला।।
शुभमस्तु,
12.10.2026◆6.30 आ०मा०
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