: 351/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
देश चलाएँगे
अब मक्खी
कॉकरोच भुनगे मच्छर!
जन मानस को
नियम सिखाते
जिनका कोई धर्म नहीं
लोकतंत्र को
तोड़ रहे हैं
नहीं देह पर चर्म कहीं
चींटा कहे
उठाए गिरिवर
लेता है अपनी टक्कर।
अनुभव शून्य
कॉकरोचों का
जमघट नंगा नाच करे
हाथ पाँव के
बिना फ़िसलते
बिना आँख के वाच करे
पछुआ हवा
भरी पीछे से
चाहत बस मीठी शक्कर।
टूटे देश
भाड़ में जाए
उन्हें चाटने का चसका
उल्लू सीधा
करके अपना
देखो कहाँ गया खिसका
पता नहीं क्यों
पों- पों करते
छात्र भले पर पूर्ण निरक्षर।
शुभमस्तु,
15.10.2026◆12.15 प० मा०
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[8:24 pm, 15/10/2026] DR BHAGWAT SWAROOP: 352/2026ववाद
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