शुक्रवार, 19 जून 2020

कृष्ण/वपु छन्द


 विधान: ss II
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✍ शब्दकार ©
🤾🏻‍♂️ डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'
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काला धन।
नेता चुन।।
 बेचो मन।
साधो सुन।।

आया रवि।
जागा कवि।।
जोड़ो कर।
मोड़ो सिर।।

सूना पन।
ऊना सुन।।
दूना गुन।
छूना मन।।

आया वह।
छाया वह।।
गाता रह।
भाता रह।।

राधा  चल।
आया हल।।
माया छल।
पाका फल।

💐 शुभमस्तु !

17.06.2020 ◆3.30 अपराह्न।

क्रीड़ा छंद


 विधान: I sss
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✍ शब्दकार ©
🤾🏻‍♂️ डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'
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चलें मेला ।
लदे ठेला।।
पके केला।
चला रेला।।

कभी अना ।
सभी जाना।।
महा    भारी।
सजी क्यारी।।

नहीं रूठो ।
मजा लूटो।।
चली जाना।
धरो बाना।।

चलो राधा ।
नहीं बाधा।।
महामारी।
सदाचारी।।

नहा धोएँ।
चलो सोएँ।।
घनी रातें ।
करें बातें।।

💐 शुभमस्तु !

17.06.2020 ◆2.15 अपराह्न।

तिन्ना छंद☘️☘️


 विधान: sss  s
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✍ शब्दकार ©
☘️ डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'
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   माता    आओ।
   आशा  लाओ।।
   मैं  हूँ   प्यासा।
  माँ   से आशा।।
    
    माँ   का  सारा।
    न्यारा   प्यारा।।
    नैना      तारा ।
    माँ   से   हारा।।

    ये      कोरोना।
   कैसा    सोना।।
   आँसू      पीना ।
    कैसा   जीना।।

     तूने       जाना ।
     मैंने      माना।।
     ताना     बाना।
     काँटे    नाना।।

     गा    गा   गाना।
     जो  भी  गाना।।
     मीठा    खाना।
     नामा    लाना।।

💐 शुभमस्तु !

17.06.2020 ◆12.30 अपराह्न।

हिंद [आह्वान गीत]


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✍ शब्दकार©
🇮🇳 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'
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हिन्द   देश  के  वीरो  जागो!
छोड़ खुमारी   निद्रा त्यागो!!

चीन शीश पर चढ़ आया है।
आँख  दिखाकर  गुर्राया है।।
कह दो उससे   पीछे भागो।
हिन्द  देश के  वीरो  जागो!!

जो   छेड़ेगा    खैर  नहीं  है।
हमें किसी   से  बैर नहीं है।।
अपने  बिल में  भागो नागो!
हिन्द देश   के  वीरो जागो!!

नियत चीन की दूषित भारी।
कोरोना की   दी    बीमारी।।
धोखे    की  टट्टी जलवा दो।
हिन्द देश के   वीरो जागो!!

आधी     तेरी  आँख बंद हैं।
कर दें  सारी ज्योति मंद हैं।।
देंगे नहीं क्षमा,  यदि माँगो।
हिन्द देश के वीरो  जागो!!

धोखे से   तू    सैनिक  मारे।
हिन्द देश का   बाग  उजारे।।
मत   इतराना   गोरे  कागो।।
हिन्द देश  के वीरो  जागो!!

नहीं  उगलतीं   गन ये पानी।
दुनिया   देख  आग  थर्रानी।।
भला यही    है  बैर न पागो।
हिन्द  देश  के  वीरो जागो!!

जिसने हमें आँख दिखलाई।
फोड़ी  दोनों    बंद दिखाई।।
झूठे  को  सच्चा मत जानो।
हिन्द देश  के  वीरो जागो!!

💐 शुभमस्तु !

17.06.2020◆9.00 पूर्वाह्न।

चाल [ दोहा ]


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✍  शब्दकार©
🐟 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'
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मदमाती तव चाल पर,देता है उर ताल।
कहने से   रुकता नहीं,   ऐसा है बेहाल।।

शकुनि चाल में फँस गए,सब पांडव रणधीर।
पासे  फेंके  छद्म  के ,उड़ा द्रौपदी  चीर।।

चाल एकरस जो चले,पाते वे गंतव्य।
विपदा मेंभी धीरधर,करते वे कर्तव्य।।

अश्व खरीदें यदि कभी,पहले देखें चाल।
चाल न कोई दे सके,देखें प्रथम सँभाल।

मधुशाला से चल दिया,एक पियक्कड़ लाल।
डगमग डगमग कर रहा, सहज नहीं है चाल।

यश पाया जग में बड़ा,कछु आ जी की चाल
जो अबाध चलता रहा, विजयश्री गलमाल।।

पिछवाड़े में एक घर, कुछ जन की है चाल।
पता नहीं वे  कौन हैं, कैसा घर  का हाल!

चींटी चढ़ी पहाड़ पर,मंद मंद मधु चाल।
गिरती फिर उठती पुनः,लेती स्वयं सँभाल।

साँझ हुई रवि अस्त है,नहीं पखेरू चाल।
वन में  सन्नाटा  बढ़ा, पंछी नीड़ निढाल।

शंख बजा जब कूच का,पड़ी छावनी चाल।
कंधे फड़के वीर के,चमके मुखड़े भाल।

आते ही बारात के युवती नारी चाल।
दर्पण के आगे सजीं,चमकाएं भ्रू गाल।

इंजन के पुर्जे सभी,करते अपना काम।
अपनी 2 चाल से,अनथक बिना विराम।।

कोरोना के काल में,दफ्तर की हर चाल।
मंद मंद है भोथरी,कोरोना भौकाल।।

नई चाल के वसन हैं, नई चाल के बाल।
नई चाल के लोग भी,लोटा थाली थाल।।

चाल बदल समझा उसे, कौशल से बदलाव।
जीवन में होता सकल,निर्मल विशद प्रभाव।

चाल समझते चीन की,भारत वासी खूब।
हम ऐसी माटी नहीं,जमे न तेरी दूब।।

सीधा -सादा आदमी,फँसा ठगों की चाल।
मूर्ख बनाकर ले उड़े,उसका सारा माल।।

तज साड़ी की चाल को,कुर्ता औ'सलवार।
अपनाती हैं नारियाँ,बदली रूप बहार।।

एक चाल में जिंदगी,उसकी बीते आज।
मजदूरी से पेट भर,रहता जो मुंहताज।।

चाल देखकर नारि की,गया पुरुष का धीर।
ज्यों घूँघट मुख से उड़ा,रही न उर की पीर।।

चाल चाल में भेद है,चाल चाल भूचाल।
चालाकी भी चाल है,गति धोखा भी चाल।।
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1.चलना,2.धोखा,3.गति, 4.गति , धोखा।5.गति,6.गति
7.आहट,8.गति,9.आहट,10. हलचल,11.चहल- पहल,12. कार्यप्रणाली,13.तत्परता,14.ढब,15.युक्ति,16.चालाकी,17.
धोखा,18.फैशन ,प्रचलन।
19.घर ,20.गति,21.विविध अर्थ।
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💐 शुभमस्तु !

16.06.2020◆3.30 अप.

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जंग [ गीत ]


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✍ शब्दकार©
🏹 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'
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हमको   कोई  आँख दिखाए।
मुँह की खाए  फिर पछताए।।

हमें  नहीं  है  शौक  जंग का।
 हम फुव्वारा  सप्त रंग का।।
क्यों सरहद पर नाच नचाये।
हमको कोई आँख दिखाए।।

जंग   हमें  भी  करनी आती।
दुश्मन    की  छाती  थर्राती।।
पीठ  दिखा वापस घर जाए।
हमको कोई  आँख  दिखाए।।

बड़े     जंगजू    देखे   हमने।
चीन पाक   के   तोड़े सपने।।
कैसे  तू   अधिकार   जताए?
हमको कोई आँख दिखाए।।

फूँके   हमने   शंख  शांति के।
नहीं  सुनेंगे  वचन  भ्रांति के।।
हमें   एकता    शांति  सुहाए।
हमको  कोई  आँख दिखाए।।

हथियारों  में   जंग    नहीं है।
यान ,टैंक ,बम सभी सही हैं।।
तू क्या अपनी  शान जताए!
हमको कोई आँख  दिखाए।।

इधर   चीन   नापाक उधर है।
खुली आँख का दृष्टि सफर है
नेपाली   को   भी   उकसाए।
हमको कोई  आँख दिखाए।।

बड़ी- बड़ी  बातें क्यों करता?
भारत   के वीरों  से डरता ??
बार -बार   हमको अजमाए।
हमको कोई  आँख दिखाए।।

💐 शुभमस्तु !

16.06.2020 ◆9.30 पूर्वाह्न।

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पायल💃💃 [कुण्डलिया]

 
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✍ शब्दकार ©
💃 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'
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 पायल बजती पाँव में,रुनझुन रुनझुन नाद।
घुँघरू  पैरों  से  करें, गीत   भरे    संवाद।।
गीत भरे संवाद,हृदय कलिका खिल जाती।
मिला निमंत्रण मौन,गज़ब नर पर भी ढाती।।
'शुभम'जगाती चाव,सदा करती उर घायल।
जब होती है शांत,घाव भरती पग पायल।।

पायल भूषण पाँव का,नारी का पग चैन।
घर आँगन छुनछुन बजे,चुप अँगना के बैन।।
चुप अँगना के बैन,निमंत्रण की संकेतक।
विनत नैन में लाज,प्रणय याच न संचेतक।।
'शुभम'सलज संवाद,हृदय को करते घायल।
बजता नव संगीत,रजत की प्रेमिल पायल।।

पायल बेड़ी पैर की,नारी पग प्रतिबंध।
भंग नहीं सीमा करें,चले मंद ही मंद।।
चले मंद ही मंद, मोहती मन को नर के।
गूँजे मधु संगीत,सुखी परिजन घर भर के।
शुभम रजत का मोह,सभी नर धी के कायल
मर्यादा की सीख दे रही,पग की पायल।।

पायल तू बड़भागिनी, प्रति क्षण छूती पाँव।
सदा संगिनी नारि की,घर बाहर या गाँव।।
घर बाहर या गाँव, नचाती है वामा को।
बनती तन शृंगार, सजाती तू कामा को।।
शुभं सुरुचि का साज, चलाती नारि मिसाइल
अनदेखे ही घात,पुरुष को घायल पायल।।

पायल की झंकार से,मन होता मदहोश।
धीरे -धीरे तुम चलो,कुछ पल ले लूँ होश।
कुछ पल ले लूँ होश, सँभल जाने दो मुझको।
होता मन बैचेन,कहर  ढाना है तुझको।।
'शुभम' तीर संधान,किया करता यों घायल।
चलती कामकमान,पाँव दो बजती पायल

💐 शुभमस्तु !

15.06.2020 ◆ 2.30 अप .

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किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...