बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

शुभम्' कहमुक़री:1

 089/2026



©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'



                      -1-

सिर-आँखों    पर      रहे    सवार।

करता     मुझसे     भारी    प्यार।।

कैसा   है    वह    नया     करिश्मा।

क्या सखि साजन,ना सखि चश्मा।।


                    -2-

मौसम    कुहू -कुहू     का आया।

कलियों पर अलि  दल  मँडराया।।

अमराई   में        मधुरस    घोले।

क्या सखि साजन,कोयल  बोले।।



                    -3-

नेतागण को    अतिशय     प्यारी।

तन- मन    में   भरती  उजियारी।।

भर - भर  देती      ऐसी    तुरसी।

ए सखि साजन, ना सखि कुरसी।।


                     -4-

फैलाता          निज         अंतर्जाल।

नर -नारी       सब     ही      बेहाल।।

भीतर -भीतर      मन    है     घायल।

क्या सखि साजन,हाथ      मुबायल।।


                     -5-

उसको   प्यार     करे  सब  कोई।

नहीं  मिले   तो    किस्मत    रोई।।

समझ नहीं    कुछ      ऐसा-वैसा।

है सखि   साजन,   केवल   पैसा।।


                      -6-

करता  घर  भर   की    रखवाली।

नहीं    अस्त्र     बंदूक    दुनाली।।

समझ सको    तो   लो जी  ताड़।

ना सखि साजन,  युगल किवाड़।।


                    -6-

पूजा   घर     में    करे     निवास।

दिव्य  शक्तियाँ     उसमें    खास।।

उड़ता  नहीं  न     उसके     पंख।

ना सखि साजन,  बजता   शंख।।


                      -7-

पीकर    पानी      जमती     मिट्टी।

लाल सुर्ख   हो   तपकर      भट्टी।।

तन  पर   नहीं    बनी    है    छींट।

क्या सखि   साजन,  सुथरी   ईंट।।


                      -8-

जग    में    एक       न    परमानेंट।

सेंट     लगाए        पहने       पेंट।।

लगा       डाइयाँ       सुथरे     डेंट।

क्या सखि    साजन,   लेडी-जेंट।।


                   -9-

आग  जले    तो    ऊपर    जाए।

अंबर    में     जाकर     मँडराए।।

आँखों    को वह    लेता     चूम।

क्या सखि साजन,ना सखि धूम।।


                     -10-

अद्भुत  उसकी   अजब  कहानी।

टपके    छप्पर     टूटी     छानी।।

उसके  बिना  न     जीता    वीर।

क्या सखि साजन,अनुपम  नीर।।


शुभमस्तु,


14.02.2026◆2.30 प०मा०

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