089/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
-1-
सिर-आँखों पर रहे सवार।
करता मुझसे भारी प्यार।।
कैसा है वह नया करिश्मा।
क्या सखि साजन,ना सखि चश्मा।।
-2-
मौसम कुहू -कुहू का आया।
कलियों पर अलि दल मँडराया।।
अमराई में मधुरस घोले।
क्या सखि साजन,कोयल बोले।।
-3-
नेतागण को अतिशय प्यारी।
तन- मन में भरती उजियारी।।
भर - भर देती ऐसी तुरसी।
ए सखि साजन, ना सखि कुरसी।।
-4-
फैलाता निज अंतर्जाल।
नर -नारी सब ही बेहाल।।
भीतर -भीतर मन है घायल।
क्या सखि साजन,हाथ मुबायल।।
-5-
उसको प्यार करे सब कोई।
नहीं मिले तो किस्मत रोई।।
समझ नहीं कुछ ऐसा-वैसा।
है सखि साजन, केवल पैसा।।
-6-
करता घर भर की रखवाली।
नहीं अस्त्र बंदूक दुनाली।।
समझ सको तो लो जी ताड़।
ना सखि साजन, युगल किवाड़।।
-6-
पूजा घर में करे निवास।
दिव्य शक्तियाँ उसमें खास।।
उड़ता नहीं न उसके पंख।
ना सखि साजन, बजता शंख।।
-7-
पीकर पानी जमती मिट्टी।
लाल सुर्ख हो तपकर भट्टी।।
तन पर नहीं बनी है छींट।
क्या सखि साजन, सुथरी ईंट।।
-8-
जग में एक न परमानेंट।
सेंट लगाए पहने पेंट।।
लगा डाइयाँ सुथरे डेंट।
क्या सखि साजन, लेडी-जेंट।।
-9-
आग जले तो ऊपर जाए।
अंबर में जाकर मँडराए।।
आँखों को वह लेता चूम।
क्या सखि साजन,ना सखि धूम।।
-10-
अद्भुत उसकी अजब कहानी।
टपके छप्पर टूटी छानी।।
उसके बिना न जीता वीर।
क्या सखि साजन,अनुपम नीर।।
शुभमस्तु,
14.02.2026◆2.30 प०मा०
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