बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

नीलकंठ नित करते त्राण [ सजल ]

 092/2026


  

समांत         :आण

पदांत          : अपदांत

मात्राभार     : 15.

मात्रा पतन   : शून्य


©शब्दकार 

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


करते   हैं    जग   का      कल्याण।

नीलकंठ    नित     करते     त्राण।।


जगवंदित      जगपूजित       शंभु।

जगत     पुकारे    कहें      पुराण।।


गंगाधर            वे         भोलेनाथ।

तरकस  नहीं    हाथ   में     बाण।।


शिव  का    नाम  जपें    हर   बार।

रक्षा    करें     जीव    के     प्राण।।


हिम   आवृत    मनहर      कैलाश।

फिर भी  शिव को प्रियल मसाण।।


धर्मप्राण    जो     मानव      जीव।

अक्षतवीर्य         करें      निर्वाण।।


'शुभम्'  जपे   हर   ॐ     शिवाय।

दिखने      में    प्रतीत     पाषाण।।


शुभमस्तु,


16.02.2026◆5.45 आ०मा०

                    ◆◆◆

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...