091/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
-1-
घर के भीतर आवे जावे।
कभी रिझावे कभी सतावे।।
करता कभी- कभी वह अनबन।
क्या सखि साजन? तेज प्रभंजन।।
-2-
कठिन किया है मेरा जीना।
बहे देह से गरम पसीना।।
मुझे भावता उसका रूप।
क्या सखि साजन? ना सखि धूप।।
-3-
चैन पड़े जब मुझको छूता।
उसके बिना न मेरा बूता।।
पड़ा - पड़ा है घर में सूता।
क्या सखि साजन?ना सखि जूता।
-4-
मित्र मंडली घर में लाता।।
चाय नाश्ता भी बनवाता।।
करता काम कभी वह लेटा।
क्या सखि साजन?ना सखि बेटा।।
-5-
एक हार वह भारी लाया।
पकड़ मुझे उसने पहनाया।।
कहता कोई उसे भतार।
क्या सखि साजन? रहा सुनार।।
-6-
न थी जरूरत उसको मेरी।
न की दान में थोड़ी देरी।।
एक दिवस कर कन्यादान।
क्या सखि साजन? पिता सुजान।।
-7-
घूँघट में दुबका कर लाया।
घर पर जाकर उसे उठाया।।
क्या सावन- का कोमल घेवर?
क्या सखि साजन?ना सखि जेवर।।
-8-
मेरे बिना न रोटी खाता।
जब खाए मुस्काता जाता।।
नहीं समझना मीठी लपसी।
क्या सखि साजन?वह चिकना घी।
-9-
कहते चार दिनों का मेला।
जिसने पाया उसने खेला।।
चूसें मधुरस करते गुंजन।
क्या सखि साजन?तन का यौवन।।
-10-
समय मिले मम मुख को चूमे।
मदमस्ती में हर पल झूमे।।
घर में रहे कभी वह लेटा।
क्या सखि साजन? अपना बेटा।।
शुभमस्तु,
15.02.2026◆4.00प०मा०
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