बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

शुभम्' कहमुक़री:3

 091/2026


  


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


                       -1-

घर      के   भीतर    आवे     जावे।

कभी   रिझावे     कभी     सतावे।।

करता  कभी- कभी   वह अनबन।

क्या सखि साजन? तेज प्रभंजन।।


                       -2-

कठिन   किया     है   मेरा    जीना।

बहे    देह     से    गरम    पसीना।।

मुझे     भावता      उसका     रूप।

क्या सखि साजन? ना सखि धूप।।


                       -3-

चैन    पड़े    जब    मुझको   छूता।

उसके  बिना   न       मेरा    बूता।।

पड़ा - पड़ा    है     घर     में  सूता।

क्या सखि साजन?ना सखि जूता।


                       -4-

मित्र  मंडली    घर     में     लाता।।

चाय    नाश्ता     भी     बनवाता।।

करता  काम    कभी   वह    लेटा।

क्या सखि साजन?ना सखि बेटा।।


                         -5-

एक    हार   वह     भारी    लाया।

पकड़    मुझे   उसने    पहनाया।।

कहता    कोई      उसे     भतार।

क्या सखि  साजन? रहा   सुनार।।


                     -6-

न    थी  जरूरत     उसको    मेरी।

न  की    दान    में     थोड़ी   देरी।।

एक     दिवस    कर     कन्यादान।

क्या सखि साजन? पिता सुजान।।


                      -7-

घूँघट  में      दुबका   कर    लाया।

घर  पर   जाकर    उसे    उठाया।।

क्या  सावन- का   कोमल     घेवर?

 क्या सखि साजन?ना सखि जेवर।।


                    -8-

मेरे     बिना     न    रोटी     खाता।

जब   खाए     मुस्काता     जाता।।

नहीं  समझना     मीठी     लपसी।

क्या सखि साजन?वह चिकना घी।


                       -9-

कहते   चार     दिनों    का    मेला।

जिसने  पाया       उसने     खेला।।

चूसें     मधुरस      करते     गुंजन।

क्या सखि साजन?तन का यौवन।।


                       -10-

समय  मिले   मम  मुख  को  चूमे।

मदमस्ती    में  हर    पल     झूमे।।

घर  में रहे   कभी    वह       लेटा।

क्या सखि साजन?   अपना बेटा।।


शुभमस्तु,


15.02.2026◆4.00प०मा०

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