बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

करते हैं जग का कल्याण [ गीतिका]

 093/2026




©शब्दकार 

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


करते   हैं    जग   का      कल्याण।

नीलकंठ    नित     करते     त्राण।।


जगवंदित      जगपूजित       शंभु,

जगत     पुकारे    कहें      पुराण।


गंगाधर            वे         भोलेनाथ,

तरकस  नहीं    हाथ   में     बाण।


शिव  का    नाम  जपें    हर   बार,

रक्षा    करें     जीव    के     प्राण।


हिम   आवृत    मनहर      कैलाश,

फिर भी  शिव को प्रियल मसाण।


धर्मप्राण    जो     मानव      जीव,

अक्षतवीर्य         करें      निर्वाण।


'शुभम्'  जपे   हर   ॐ     शिवाय,

दिखने      में    प्रतीत     पाषाण।


शुभमस्तु,


16.02.2026◆5.45 आ०मा०

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