गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

वे शहीद नहीं तो क्या हैं ? [अतुकांतिका]

राष्ट्र की रक्षा का जिसने
पढ़ लिया है पाठ,
कर्तव्य की धरती पर
जिसके चरण ऊँचे हाथ,
कर दिया जिसने सभी
अपने सुखों का त्याग,
लगने नहीं  दिया कभी भी
माँ के भाल पर भी दाग़,
देश -हित अहर्निश समर्पित
माँ के चरणों में
कर दिए हैं शीश अर्पित,
वे शहीद नहीं 
तो क्या हैं?

एक ही जज़्बा 
जूनून बस एक ही,
जोश से भरा हुआ
लबालब जिसका हृदय,
देश! देश!! और देश!!!
न घर न पत्नी न माँ-बाप,
दुधमुँहे नन्हों के 
स्नेह का ताप,
सीमा का प्रहरी 
आस्था गहरी,
मार दो दुश्मन को
या मर जाओ
देश के लिए 
देशवासियों के लिए
हमारे लिए 
तुम्हारे लिए,
वे शहीद नहीं
तो क्या हैं?

ये मृत्यु नहीं
वीरगति है,
पुलवामा के अमर
 शहीदों की
उनका इतिहास
समय के पटल पर 
लिखा जाएगा 
स्वर्णाक्षरों में,
नहीं की जाएगी
गणना उनकी
छ्द्मी शोषक 
रक्तचूषक मच्छरों में,
लजाया नहीं जिसने
जननी के आँचल का दूध
कर्तव्य की बलिवेदी पर
चढ़ गए वे पूत,
वे शहीद नहीं
तो क्या हैं?

मत करो सियासत 
न सेंको रोटियाँ अपनी,
वोट और सत्ता के लिए
बन्द करो तकरार सभी,
भेजकर देखो सीमा पर
किसी अपने 
जिगर के टुकड़े को
तभी जान पाओगे
कुलवामाओं के दुखड़े को,
और कह उठोगे
वे शहीद नहीं 
तो क्या हैं?

💐शुभमस्तु !
✍ रचयिता ©
 डॉ.भगवत स्वरूप'शुभम'

बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

भारत की हुंकार [कुण्डलिया]

सेना   की  सामर्थ्य का,
कठिन   परीक्षा  - दौर।
खौल रहा है  खून अब,
गले  न    जाए    कौर।।
गले  न    जाए     कौर,
न खोना   धैर्य  हमारा।
सोच - समझ  पग  बढ़ें,
शक्ति का हमें  सहारा।।
एक ओर   दुःख  गहन,
देश   की   नैया   खेना।
शान्ति   नहीं     विश्राम,
जूझती    भारत  सेना।।

खाते   हैं   इस  देश का,
गाते     उनके       गीत ।
हैं  कृतघ्न  वे नारि -नर,
कभी  न  सच्चे   मीत।।
कभी  न   सच्चे    मीत,
जन्म  लेते    मर  जाते।
क्रिकेट    में   हो    हार,
पाक हित खुशी मनाते।
दिल  के   बीच   दिवार,
खड़ी  कर पत्थर  ढाते।
सेना का  अपमान करें,
फिर   मुंह   की  खाते।।

भारत    की    हुंकार  से,
काँपा          पाकिस्तान।
ध्वज   ऊँचा  फहराएगा,
अपना          हिंदुस्तान।।
आपना          हिंदुस्तान,
जंग    छेड़ता   नहीं   है।
छेड़े         कोई       जंग,
उसे   छोड़ता   नहीं   है।।
अब  सुबूत क्या  माँगता,
करें हम  तुझको  गारत।
सोच -  समझ    इमरान,
नहीं कम ताकत भारत।।

लात   भूत  कब  मानते ,
समझाने      पर    बात।
छिप-छिपकर  घोंपे छुरी
करें    पीठ    पर   घात।।
करें     पीठ   पर    घात ,
सबक  सिखलाना ही है।
कामरान      तो     गया ,
लक्ष्य  इमरान  सही है।।
चैन न  हमको   आयगा,
दिन  हो      चाहे    रात।
भूल   जाएगा    हेकड़ी,
पड़े   कमर  पर  लात।।

बोली  से  अब  बात के,
रहे    न   वे   दिन -रात।
गोली  बम  बारूद    से,
होनी    है   अब   बात।।
होनी   है     अब   बात,
न रण   से   मुँह मोड़ेंगे।
खड़े    हो     गए    शेर,
दाँत गिन-गिन  तोड़ेंगे।।
नहीं   गाँठ    में    दाम,
पाक  फैलाता   झोली।
बहुत   साल     से सुनी,
झूठ  की  भाषा-बोली।।

💐 शुभमस्तु !
✍ रचयिता©
डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019

कुलवामाएँ बिलख रही हैं [राष्ट्रभक्ति गीत]

कुलवामाएँ   बिलख  रही हैं
पुलवामा    में     जा    सोए।
सुधि ले   लेते  अपनी माँ की
आँसू      जार - जार    रोए।।

लाज रखी माँ के आँचल की
देह    देशहित   होम  किया।
अमर शहीदों  की कतार  में
नाम लिखाया  सोम किया।।
पता नहीं था इतना   हमको
नहीं  लौट    घर    आओगे।
तुम्हें  देख लेती   मैं जी भर
अब   शहीद   कहलाओगे।।
कौन घड़ी   थी    मेरे बच्चे
जब तुम जननि कोख़ बोए।
कुलवामाएँ बिलख ....

आँसू   रुकते    नहीं नयन से
तेरी       दुल्हन      रोती   है।
दिवस रात भर पड़ी अधमरी
धरा   अश्रु    से   धोती   है।।
बच्चे  लिपट-लिपट कर पूछें
पापाजी      कब      आएँगे।
तोप  टैंक   बंदूक   खिलौने
देकर     हमें     खिलायेंगे।।
गुमसुम पिता   तुम्हारे  बेटे!
चिंतामग्न    कहाँ      खोए?
कुलवामाएँ  बिलख ....

बहन    तुम्हारी   पूछ  रही  है
किसको    राखी       बाँधूँगी!
भैयादूज   करूँगी    किसकी
मनोकामना           साधूगी!! 
अब मैं   किसको तंग करूँगी
माँगूँगी        उपहारों       को।
अँगुली पकड़ चलूँगी किसकी
देखूँगी   क्या    तारों    को??
आँसू  के  झरने    बहते   हैं
मुन्नी    के    नयनों -  कोए।।
कुलवामाएँ बिलख....

गली -  मोहल्ले के सब वासी
कर - कर   याद   दुःखी होते।
हँसमुख मिलनसारिता की सुधि
करते   सजल   नयन   रोते।।
भाभी बिलख बिलख कर बोली
किससे    होली       खेलेंगे?
देवर जी  कह   गए   हमारे
गुझिया   पापड़   भी लेंगे।।
महीना भर ही शेष रहा था
सब   ही   बाट   रहे  जोए।
कुलवामाएँ बिलख ....

हमें    गर्व है    तुम  पर बेटे
जन्मभूमि  का  हित साधा।
राष्ट्र -त्राण में प्राण होम कर
दुःख कर   दिया  है आधा।।
वीरप्रसू     कहलाऊँगी   मैं
धन्य   कोख़    मेरी  तुमसे।
बिना  तुम्हारे   जीवन कैसा
जिया  नहीं    जाता  हमसे।।
दायित्वों के   वृहत  कर्म से
शुभम भारती-दृग धोए।
कुलवामाएँ बिलख ....    ।।

शुभमस्तु!
✍रचयिता ©
डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

सोमवार, 18 फ़रवरी 2019

बाल -प्रतिज्ञा [बाल गीत]

 हम भारत के बाल वीर हैं
इसकी शान   न  जाने देंगे।
खट्टे दाँत   करें  दुश्मन  के 
नज़र न इधर   उठाने देंगे।।

आनमान पर जीना सीखा
आनमान पर  मर  जायेंगे।
पीठ दिखाकर युद्धभूमि से
नहीं  लौटकर घर जाएँगे।।
दूध पिया है  जननी माँ का
उसका कर्ज़ अदा करना है।
माँ के आँचल की रक्षा का
पावन फ़र्ज़ अदा करना है।।
मातृभूमि की रक्षा के हित
झंडा नहीं   झुकाने   देंगे।
हम भारत के ....

चन्दन है  भारत   की   माटी
लगा तिलक माथे पर अपने।
सीमा पर प्रहरी सैनिक बन
जाएँगे हम  हिम् पर तपने।।
ले आशीष पिता- माता का
त्राण - यज्ञ  पूरा करना  है।
प्राणों की समिधा ले कर में
जोश हवाओं में भरना है।।
दुश्मन के काले बादल की
घटा नहीं   हम छाने  देंगे।
हम भारत के ....

बर्फ़ीली आँधियाँ   चलें  या
तूफ़ां   झंझावात   रातदिन।
जज़्बा जोश जुनूँ का सागर
लहराएगा उर में छिन-छिन।।
सुख  की  नींद   नहीं सोयेंगे 
देश-त्राण   ही   धर्म  हमारा।
झुलस न पाए माँ का आँचल
एकमात्र  ये   कर्म    हमारा।।
हम अखण्ड  भारत के बच्चे
टुकड़े   नहीं    बनाने    देंगे।
हम  भारत के....

💐शुभमस्तु !
✍रचयिता ©
डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम

पुलवामा की आग [दोहे]

पुलवामा  के   रक्त को,
भुला   न    पाए   देश।
लेगा  वह प्रतिशोध भी,
सुन  ले  कटु  सन्देश।।

खूँ  का  बदला  खून है,
गूँज  रहा     हर   ओर।
ज्वाला  भड़की देश में,
नहिं  बचाव  का  ठौर।।

गीदड़  निकला माँद से,
ओढ़   शेर   की  खाल।
धोखे  की  टटिया लगा,
ठोक    रहा   है   ताल।।

कब तक खैर मनायगी,
बकरे      तेरी      मात।
लड़ना  है  तो इधर आ,
छिपकर  करता  घात??

फन कुचलें उनका प्रथम,
आस्तीन     के      साँप।
पले  सपोले     डस  रहे,
मनुज    रहा   है काँप।।

ग़म  गुस्से  की  आग में,
जलने   का     अंजाम।
दुनिया   देखेगी   प्रकट,
शान्ति   नहीं  विश्राम।।

गीदड़   तेरी  मौत  का,
समय  बहुत  नज़दीक।
क़दम बढ़ाना सोचकर,
मिटे  साँप  की  लीक।।

ग़म  से  नम माहौल में,
सोचो     धरके     धीर।
दोषारोपण    आपसी,
अनुचित अति गंभीर।।

बोया  बीज   बबूल का,
नहीं     फलेंगे     आम।
काँटे   ही   चुभते   रहे,
सुबह   हो  गई   शाम।।

शांति सुह्रद सौहार्द्र का,
देना     शुभ      संदेश।
'शुभम' एक थे    एक हैं,
एक       हमारा    देश।।

शुभमस्तु !
✍ रचयिता ©
☘ डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम'

रविवार, 17 फ़रवरी 2019

सेना बुरके में छिपी क्यों? [गीतिका]

◆1◆
गीदड़ों   की  मौत का ये,
अब   बुलावा   आ गया !
ग़म का साया देशभर में,
ये  अचानक  छा   गया!!
जागते शेरों  को जिसने,
वार कर ललकार डाला।
आख़िरी ये वक़्त उसका,
मौत का बनने निवाला।।

◆2◆
मुँह  कुचलना है सपोलो,
भाग  कर  जाते    कहाँ?
दूध  पीकर जहर उगलो,
चैन     से   रहते    यहाँ।।
जन्म   लेते   खाते-पीते,
देश  भारत  की    जमीं!
मर  चुकी  है  आँख  की,
थोड़ी-बहुत बाक़ी नमीं।

◆3◆
धिक्कार पाकिस्तान तुझको,
धिक्कार  है  धिक्कार है।
बाप को आँखें दिखाता ,
जन्मना मक्कार  है।।
अब हमें बरदास्त करना,
एकदम   संभव     नहीं।
नाम   मिट  जाए धरा से,
अबनिकटवह वक़्त ही।।

◆4◆
एक  पुलवामा  के बदले,
दस  की  ताकत   है हमें।
सामने आकर दिखा दम,
कायराना         हरकतें।।
आ गए अपनी तरह हम,
बन धुँआँ    उड़   जएगा।
पहचानने  वाले न होंगे,
सिर न धड़ रह पाएगा।।

◆5◆
जोश जज्बाऔ' जुनूं का
हौसला  'गर      देखना।
ओट टट्टी की न छिप तू,
(दो)दो हाथकरके देखना
सेना बुरके में छिपी क्यों,
आतंकियों  को  भेजता।
मर रहा जो भूख से नित,
दण्ड    चूहा      पेलता।।

💐 शुभमस्तु !
✍ रचयिता©
डॉ. भगवत स्वरूप "शुभम"

शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

आखिर कब तक?

   पुलवामा हमले में शहीद हुए देश के अमर जवानों का दुःखद समाचार जानकर मन स्तब्ध रह गया। कुछ समझ में नहीं आया कि क्या करें?क्या कहें ?क्या लिखें? कश्मीर को लेकर  आये दिन इस प्रकार हमले हो रहे हैं। हमारे देश के नेता और सत्ता पक्ष आख़िर क्या कर रहा है? केवल शृद्धाञ्जली देने से काम चलने वाला नहीं है। देश क्रोश में है। शहीदों के सम्मान में उनकी आत्मा की शांति के लिए देश भर में मोमबत्तियां जलाकर शृद्धाञ्जली अर्पित की  जा रही है।  विरोध में पड़ौसी देश के विरुद्ध पुतले दहन किए जा रहे हैं, लेकिन क्या इतने से ही हमारे कर्तव्य की इतिश्री होने वाली है? ये हादसे प्रश्न पर प्रश्न खड़े कर रहे हैं।
   विपक्ष को ऐसे संकट की घड़ी में देश की रक्षा और अस्तित्व के लिए एक होकर सहयोग करना चाहिए। जब देखा यह जा रहा है कि वह ऐसे वक़्त में अपनी रोटियाँ सेंकने लगता है। अरे नेताओ ! कीचड़ उछालने के लिए पांच साल पड़े हैं। पक्ष और विपक्ष पांच वर्ष से औऱ करता ही क्या रहा है? बस एक दूसरे की कमियां निकलना अपनी प्रशंसा के ढोल पीटना और अतीत के विकास को विस्मृत कर देना, बस कीचड़ - उछाल के ये ही प्रमुख मुद्दे हैं। जब हम पूरे समय रात -दिन इसी  छींटाकसी में ही लगे रहेंगे, तो देश के लिए सोचने के लिए वक़्त ही कहाँ बचेगा! समय तो उतना ही है, चाहे उसे कीचड़-उछाल में बरवाद कर दो या देश की रक्षा के लिए सोचने में , उपाय करने में बरवाद कर दो।
   प्राथमिकता देश की रक्षा होनी चाहिए। यदि देश है तो हम हैं, यदि देश ही सुरक्षित नहीं तो हम कब तक रहेंगे!इसलिए देश के प्रत्येक नागरिक का ये दायित्व है कि वह देश की रक्षा के लिए अपनी सोच विकसित करे और उसी के लिए हमारी सोच सदैव सकारात्मक ही रहे। जब हम देश रक्षा के बिंदु पर एक होकर रहेंगे, संगठन सुदृढ़ और सशक्त होगा तभी हम  शेष रहेंगे।
   सता पक्ष के एक सांसद का बेतुका और गैरजिम्मेदाराना बयान सुनकर उसकी नादानी औऱ बचकानी हरक़त पर बहुत विदीर्णता मन में आती है। ऐसे संवेदनशील समय में सत्ता पक्ष के नेताओं के ऐसे बयान देशद्रोह की सीमा में आने  चाहिए। इन्हें सांसद पद से पदच्युत किया जाना चाहिए। लेकिन क्या किया जाए सत्ता-पक्ष के नेता ने कहा है, इसलिए अगले दिन के अखबारों में उसको तोड़मरोड़कर पेश कर कर दिया जाएगा और उसके ऊपर दही -बूरा लीपकर बराबर कर दिया जाएगा। अगर यही बात किसी विपक्षी नेता ने कही होती, तो सत्ताधारी उसे ले उड़ते।और उसे देश द्रोही और न जाने कितनी कीचड़ सनी पदवियों से विभूषित कर चुके होते।
   जब हमारी रक्षा करने वाले ही सुरक्षित नहीं तो हम सुख की नींद कैसे सो सकते हैं। आज तरस आता है हमें ऐसे  निम्न सोच वाले नेताओं की बुद्धि पर। हमें कष्ट होता है कि ऐसे ही प्रबुद्ध मूर्ख सांसदों को  जनता क्यों चुनती है? क्यों ऐसे अशिष्ट नेताओं को राजनीति से बहिष्कृत नहीं किया जा रहा ! कटु सत्य भी समय और परिस्थिति को दृष्टि-गोचर करते हुए बोला जाता है। ये  दिवंगत आत्माओं का अपमान है। क्या श्मशान में या उसके परिजनों के समक्ष ये कहना उचित और समयानुकूल होगा कि मरने दो उन्हें तो मरना ही था?  ये विवेक नहीं है। उस समय परिजनों के हृदय पर बरछी नहीं चल जाएंगी?  यदि नेताजी का एक बेटा ऐसे हादसों में शहीद हो जाता तो क्या वे ये शब्द कहते कि जवान तो मरते गई हैं, वे मरने के लिए ही होते हैं। शर्म आनी चाहिए उस नेता को अपने इस बयान पर! चुल्लू भर पानी में डूबकर मर मर जाना चाहिए। हमें शर्म आती है कि हमारे देश और प्रदेश में ही नहीं सत्ताधारी दल के दलदल में ऐसे कीचड़ भी फ़लफूल रहे हैं!
   देश के उन अमर जवानों को मेरी हार्दिक शृद्धाञ्जली, जिन्होंने देश रक्षा हित प्राणपण से अपने कर्तव्य का निर्वाह किया। परम्पि ता परमात्मा उनकी आत्मा को परम् शान्ति प्रदान करें।औऱ उनके परिजनों को इस असीम
वज्राघात को सहन कर पाने के सामर्थ्य प्रदान करे। धन्य हैं वे माताएँ जिन्होंने ऐसे सपूत पैदा किए जो देश के काम आए। धन्य हैं वे पिता जिन्होंने अपने लाडलों को देश को समर्पित किया। धन्य हैं वे बहनें जिन्होंने अपने सुहाग के सिंदूर को सार्थक कर देश की रक्षा के योगदान में जी जान लगा दी। धन्य वे छोटे -छोटे नन्हें बच्चे जिनके पिता अब प्यार से उनके सिर पर हाथ नहीं फेर सकेंगे , क्योंकि उन्होंने अपने अस्तित्व की बाजी देश रक्षा के लिए लगा दी है।

जय हिंद ! जय जवान!!
देश के शहीद अमर रहें, अमर रहें।।

💐शुभमस्तु !
✍ लेखक ©
 डॉ. भगवत स्वरूप "शुभम"

किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...