बुधवार, 2 जनवरी 2019

चित्र भरे संदेश न भेज [गीत]

शुभ  चित्रों को रखें सहेज,
चित्र  भेजने   से    परहेज।

स्मृति  पटल   घेरते   ज़्यादा,
चित्रप्रदूषण से क्या फ़ायदा?
कोलाहल   से   भरे   संदेश।
चित्र  भरे  संन्देश  न  भेज।।

नकल   मार कॉपी करते हो,
मोबाइल -   स्मृति  भरते हो,
आता है  कट  पेस्ट  मात्र ही,
कभी कभी तो मौलिक भेज
चित्र  भरे  सन्देश  न  भेज।।

बुद्धि सौ गुनी नहीं काम की,
नकल टीपअपने सुनाम की,
पशु मानव  में है  क्या  भेद?
चित्र   भरे   संदेश  न  भेज।।

चित्र भेजना   मजबूरी  हो,
प्रेषण   बहुत   जरूरी   हो,
बना चित्र को इतना आम ,
चित्र  भरे सन्देश  न भेज।।

एक  वीडियो  फोटो  चार,
करते   मोबाइल    बीमार,
दवा न उसकी पास तुम्हारे,
चित्र  भरे   संदेश   न भेज।।

भाषा है   प्रतीक  भावों की,
मनुजबुद्धि क्षमता चावों की,
मत चित्रों  की  कलम कुरेद।
चित्र   भरे   संदेश   न भेज।।

शुभ रात्रि  या  सुप्रभात हो,
होली   दीपावली   साथ  हो,
शादी ब्याह जन्मदिन मुंडन,
चित्र  भरे   संदेश    न भेज।

आरक्षित    प्रतीक हैं   सारे,
इनको भी मानव आजमा रे!
पी  डी एफ के   भेज संदेश,
चित्र भरे  सन्देश   न  भेज।

मेहमत लगे न बहे  पसीना,
ऐसा भी क्या मित्रों जीना!
अपनी धी को 'शुभं 'कुरेद ,
चित्र भरे  संदेश  न  भेज।।

💐शुभमस्तु !
✍🏼रचयिता ©
🌿 डॉ. भगवत स्वरूप "शुभम"

आशाओं का देश [छन्द : कुण्डलिया]

स्वागत है नववर्ष का, दो हज़ार उन्नीस।
समृद्धि में ऊँचा उठे, भारत माँ का शीश।।
भारत माँ का शीश, शांतिमय हो खुशहाली।
खिले मृदुल नवहास, अधर युग में नव लाली।।
ज्ञान-सूर्य की रश्मियाँ, 'शुभम'बिखेरे भारत।
हृदय-सुमन से वर्ष का, बार-बार है स्वागत।।

ज्ञान और विज्ञान का , फैले शुभ संदेश।
विश्व -पटल पर कीर्ति की, फहरे ध्वजा स्वदेश।।
फहरे ध्वजा स्वदेश, आत्म निर्भर नर-नारी।
निर्धनता हो दूर, न कोई रहे दुःखारी।।
स्वस्थ रहे जनगण सदा, उदय 'शुभम' शशि भान।
कला और साहित्य का,सार्वभौम सत ज्ञान।।

आओ हम मिलकर करें, नव भारत साकार।
शिक्षा मानव धर्म को, दें नव रूपाकार।।
दें नव रूपाकार,न शोषण हो जन -जन का।
निज श्रम ईमान से, करें पोषण तन-मन का।
स्वच्छ वायु में साँस लो, प्रदूषण मत फैलाओ।
परिजीवीपन छोड़,'शुभं' अपने पथ आओ।।

अपने लालच -अनल में, मत झोंको ये देश।
लगा मुखौटे नित नए, बदल-बदल निज वेश।
बदल -बदल निज वेश, नहीं सोई अब जनता।
जाते हो उस ठौर, काम बिगड़े या बनता।।
कथनी करनी अलग है, दिखा'शुभं'नित सपने।
समझ रहा जनगण सभी, कितने हो तुम अपने।।

पति था पत्नी का पुरुष, पतित हुआ क्यों आज।
धर्म कर्म का त्याग कर, नेताजी के साज।
नेताजी के साज, सभी कुछ तेरी सत्ता।
पैसा पद की भूख , छीन मत तन के लत्ता।
ऊपर जाकर क्या बने, होगी कैसी गति।
सोचा 'शुभम'न अंश भर, मति के मारे पति।।

💐शुभमस्तु ! 
✍🏼रचयिता ©
☘ डॉ. भगवत स्वरूप"शुभम"

मंगलवार, 1 जनवरी 2019

आओ हम नववर्ष मनाएँ [बालगीत]

आओ हम   नववर्ष  मनाएँ,
नव आशा का दीप जलाएँ।

बीता विगत नए का स्वागत,
शुभ कर्मों  में  रहें  सदा  रत,
नाचें  -  कूदें   हर्ष     मनाएँ,
आओ  हम   नववर्ष  मनाएँ।

समयबद्धता   रवि  से सीखें,
नई   कल्पना  कवि  में दीखे,
शशि-साशीतल हृदय बनाएं,
आओ   हम  नववर्ष  मनाएँ।

पानी सा निर्मलतम मन हो,
कर्मठतामय  अपना तन हो,
क्षमाशीलता  उर  में  लाएँ,
आओ  हम नववर्ष  मनाएँ।

धरती   माता  धैर्य  सिखाती,
अंक लिए निज  नेह जताती,
सुखदसमीरण-सा बन जाएं,
आओ  हम   नववर्ष  मनाएँ।

हो विस्तार गगन -सा मन में,
तपते हुए अनल - सा तन में
रुकें  नहीं  आगे  बढ़  जाएं,
आओ हम   नववर्ष  मनाएँ।

प्रभु का वंदन अर्चन कर लें,
मानव तन  मानवता उर लें,
बच्चों-से निश्छल बन जाएं,
आओ हम नववर्ष   मनाएँ।

सदा प्रकृतिसंग रहना सीखें,
पर के   दोष  रहें   अनदीखे,
'शुभम'सत्यशिवमार्ग बताएँ।
आओ   हम   नववर्ष  मनाएँ।।

💐 शुभमस्तु !
✍🏼  रचयिता ©
💞 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

सोमवार, 31 दिसंबर 2018

गुड़ खाएँ गुलगुले न भाएँ [ दोहे ]

गुड़ खाएँ नित प्रेम से,
पर गुलगुले  न  भाएँ।
युग को पहचानें नहीं,
भारतीय    कहलाएं।।1।

पेंट सूट धारण किया,
बाँधें         कंठलँगोट।
धोती कुर्ता त्यागकर
ढूंढ़  रहे  हैं  खोट।।2।

साड़ी ब्लाउज़ भी गया,
जींस  टॉप   ली   धार।
क्यों मानें   नववर्ष को ,
मनमानी    सरकार।।3।।

विवाह निमंत्रण -पत्र में
अंग्रेज़ी           तारीख ।
पर  विरोध  की  दे  रहे,
समय -विरोधी सीख।।4।

अंग्रेज़ी     तारीख    से,
सर्विस    हर    व्यापार।
नए  वर्ष  के  वदन  पर ,
कीचड़   की  बौछार!!5।

ट्रेन  बसें वायुयान  सब ,
आंग्ल   वर्ष    अनुरूप।
अपने  पथ चलते सभी ,
क्यों विरोध का कूप??6।

जन्म दिवस निज पुत्र का,
या         स्कूल -    प्रवेश ।
दशमी   माह  अषाढ़  की,
क्या लिखता है देश??7।

अंग्रेज़ी     -   स्कूल     में ,
पढ़ती       है       संतान ।
अंग्रेज़ी  -    नववर्ष    के ,
स्वागत  से अनजान!!8।

कृष्णपक्ष  की    अष्टमी,
पौष     मास   में     रेल।
समय -सारिणी  में नहीं ,
पैसेंजर       या      मेल।।9।

मिश्रित संस्कृति सभ्यता,
शुद्ध     न      लोकाचार।
इस्लामी        अंग्रेज़ियत,
सबका  बना    अचार।।10।

हिंदी ,    उर्दू ,    फ़ारसी,
अरबी     सबका    मेल।
भाषा - जननी  संस्कृत,
अंग्रेज़ी  का  भी  खेल।।11।

हिज़री , विक्रम , ईसवी ,
शक   संवत     व्यवहार।
विश्व  - पटल  पर एक  ही,
सन  का  है   विस्तार।।12।

फ़िल्म,अनुकरण,रूढ़ियाँ,
कला ,   काव्य ,    संगीत ।
प्रथा  पूर्वजों   की  प्रबल,
सिखा  रही  नवगीत।।13।

समय   बदलता  जा रहा,
ज्यों   सरिता    का   नीर।
चले  समय के  साथ जो,
उठे  न  उर  में   पीर।।14।

अपने -  अपने  राग  की
ढपली    कर    लें   बन्द।
वीणा  की  झनकार  के,
"शुभम"न बिसरो छन्द।।15।

शुभमस्तु !
✍ रचयिता ©
 डॉ.भगवत स्वरूप "शुभम"

जीवन [ मुक्तक ]

दिन बदलते गए रातें ढलती गईं,
ज़िंदगी यों ही  राहें बदलती गई,
पीछे मुड़कर जो देखा हमने 'शुभम,
घड़ियाँ बालू -सी कर से फिसलती गई।

सुख में तो   साथी   बहुत हो गए,
कोई दिखता नहीं जब हम रो गए,
तिनके का सहारा बहुत था 'शुभम'
जो कहते थे अपना कहाँ खो गए।

सुख स्थिर नहीं तो दुःख क्यों रहे,
घड़ी की  सुइयाँ  नीचे  ऊपर  रहें,
एक वक़्त में एक ऊपर नीचे 'शुभम'
सुख दुःख का समय भी यों ही रहे।

मेरे हँसने पर  जमाना हँसने लगा,
मैं रोया तो जमाना खिसकने लगा,
दोष मढ़कर मेरे सिर मुझ पर हँसा,
निज को भी कसौटी न कसने लगा।

जीवन जीने का नियम भी सुनहरा नहीं,
कोई कह दे कि इस पर चलना सही,
सबको अपनी राहें बनानी हैं 'शुभम',
ज़िंदगी सदा रंगों को बदलती रही।

💐शुभमस्तु ! 
✍🏼रचयिता©
☘ डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम'

शनिवार, 29 दिसंबर 2018

हवा [ बाल कविता ]

जीवन  जीव   हवा  आधार, 
बिना  हवा   नैया   मँझधार।

साँस माँस नररक्त  समायी,
बिना वायु तन मृत -सा ही,
शेष कुछ क्षण का ही सार,
जीवन जीव ....

लता वृक्ष कलियाँ फल झूलें,
सावन में   शाखा  पर  झूले,
पवन का संयत शुद्ध  प्रसार,
जीवन जीव ....

वाहन    धावें   सदा  पवन   से,
करते ऊष्मा तीव्र तीव्र शमन वे,
भरी   पहिए  में   हवा    सुधार,
जीवन जीव....

जल थल अम्बर अनल समाया ,
नदिया सागर -जल  में    छाया,
गति   का   नाम  वायु  आभार,
जीवन जीव ....

बिना  हवा   अंकुर  न हरा हो,
हरित लवक का सिंधु भरा हो,
फल में आता 'शुभम'खुमार।
जीवन   जीव   हवा  आधार।। 

💐शुभमस्तु  !
✍🏼रचयिता ©
🌹 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम

पानी [बाल कविता]

नाम  सत्य जीवन  पानी का।
प्रकृति -प्रदत्त महादानी का।।

पानी   से     जीवन   संसार,
बिन पानी सब कुछ निस्सार,
जीव - जंतु  सर्वत्र  नीरमय  ,
नाम सत्य.....

पौधे  लता  पुष्प  फल  सारे,
रस मधु दुग्ध सलिल  उद्धारे,
रक्त माँसअस्थियां कोशिका,
नाम सत्य....

नदियाँ  सागर  ओस  तुषार,
तुहिन मेघ अम्बर  का प्यार,
पावस शरद शिशिर  हेमन्त,
नाम सत्य....

भ्रूण डिंभ रज या नर -बिन्दु,
जल से  सराबोर  हर  सिंधु,
वाणी -निसृत कविता में भी,
नाम सत्य....

आँख का पानी जो मर जाए,
मोती क्या   मानुष जी पाए?
रोटी 'शुभम'नहीं है जल बिन।
नाम सत्य  जीवन  पानी का।।

💐शुभमस्तु !
✍🏼रचयिता "©
☘ डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...