शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2023

फागुन का धमाल 🎊 [ गीतिका ]

 60/2023

 

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✍️शब्दकार ©

🪷 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम्'

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फागुन   का   होता धमाल है।

प्राची का अरुणाभ  भाल है।।


चादर   सेत   न   सूरज  ओढ़े,

डफ ढोलक की बजी ताल है।


पादप पर पखेरु  की हलचल,

नाच उठी हर डाल -  डाल है।


कुक्कड़ - कूँ  की  टेर  लगाए,

तमचूरों   की   नई   चाल   है।


मानसरोवर     में    जा   देखें,

है   प्रसन्न    भोला  मराल  है।


हँसती मुस्काती रवि - किरणें,

फैला स्वर्णिम किरण-जाल है।


'शुभम्' महकते क्यारी- क्यारी,

पाटल - दल  मानो प्रवाल  है।


🪴शुभमस्तु !


06.02.2023◆5.00आरोहणम् मार्तण्डस्य।


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