शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

अब तो उजाला हो [ गीतिका ]

 300/2026


      


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


खुल  गए   कॉलेज,  अब  तो  उजाला हो।

बढ़-चढ़ मिले नॉलेज, अब तो  उजाला हो।।


बिल्डिंगें   ऊँची ,   भवन   मरमर   जड़े सारे,

उचित   है   मैसेज, अब    तो   उजाला हो।


दिखते   नहीं   विद्यार्थी,ऑफिस   में   हैं बाबू ,

मालिक  बने   अंग्रेज, अब  तो  उजाला हो।


बैंक   में    अंबार ,  शुल्कों   के    लगे    ऊँचे,

सज   गई   है    सेज, अब   तो  उजाला हो।


बिन  पढ़े     होगी  नहीं , शादी कहीं  से भी,

बढ़   गया   है  क्रेज़,  अब   तो   उजाला हो।


पढ़ते  सभी लड़के,यहाँ पर लड़कियाँ भी हैं,

मोटा  मिले    पैकेज, अब   तो  उजाला  हो।


देखे   सभी   ये  दृश्य,  सारे आँख  से अपनी,

पलटे  नहीं  बस  पेज, अब  तो उजाला हो।


शुभमस्तु,

24.09.2026◆ 12.15 प० मा०

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