बुधवार, 30 सितंबर 2026

अनुवाद [ रोला ]

 318/2026



         


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


                         -1-

जननी-जनक    निनाद, गेह   में   रौनक लाए।

अवनी पर अनुवाद,सभी  परिजन  को भाए।।

'शुभम्' करे कल्याण, मुदित मन लाड़ लड़ाता।

संतति शोभित त्राण,शुभद   का  जीवन दाता।।


                          -2-

सहज   नहीं  अनुवाद,बदलती  कोई  भाषा।

अंतर्मन   का   नाद,   करे    पूरी अभिलाषा।।

'शुभम्'   न रहे  दुरूह,  समझना भाव अनोखे।

टूटे     दुष्कर   व्यूह, नहीं   बचते  फिर धोखे।।


                         -3-

सबके     अपने   भाव, अलग भाषाएँ  सारी।

शब्द न   देते   घाव, मधुरता   सबमें   प्यारी।।

अनुवादों   से  मूल,  बदलता   उसका सारा।

हिल   जाती   है चूल,शेष   रस बचे  न प्यारा।।


                         -4-

प्रियता   में अनुवाद,   नहीं  वे भाव जगाए।

उठे     न    अंतर्नाद,  अहंता अपनी   लाए।।

'शुभम्'  बनें  तैराक, नाव क्यों उनकी खेना।

छान रहे क्यों   खाक,बुलाकर  उनकी सेना।।


                          -5-

बदल   शब्द  - अनुवाद, नहीं कुछ इतना  भाए।

सुने    नहीं    फरियाद, हृदय  को सरस रिझाए।।

'शुभम्'  सीख  वह ज्ञान,शक्तिमय हो निज भाषा।

प्रियता का  रख मान, हृदय अभिनव  अभिलाषा।।

शुभमस्तु,


29.09.2026◆8.15 प०मा०

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