रविवार, 27 सितंबर 2026

तू मत समझना [ गीतिका ]

 307/2026



           


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


बुद्ध   की   संतान  है, तू   मत समझना।

इस देश  का तू  मान है,तू मत समझना।।


संस्कृति नहीं है  सभ्यता,  तेरी यहाँ की,

तेरा न हमको ध्यान है, तू  मत समझना।


उगतीं  कँटीली  झाड़ियाँ  भी, जंगलों में,

हमको नहीं संज्ञान  है, तू मत समझना।


जोड़ता  जिस देश  को,  टूटा  नहीं   है,

योजक नहीं विषखान है,तू मत समझना।


आते  मिटाने  के लिए,  संतान   कुछ तो,

वंश  की   पहचान  है,  तू  मत समझना।


मूढ़ता    के   ढेर   में,    है     कूढ़ता  ही,

चलना  न तेरा प्लान है,तू  मत समझना।


देश की नजरें 'शुभम्' , तुझ पर टिकी हैं,

सठिया गया तू  ज्वान है,तू मत समझना।।


शुभमस्तु,


27.09.2026◆12.30 प०मा०

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