317/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
खुद हमीं बनाते रोड, तुम्हें बस चलना।
हैं हमीं तुम्हारे गोड, तुम्हें बस चलना।।
करना मत बुद्धि प्रयोग,कहें वह मानो,
सब चलते अपने कोड, तुम्हें बस चलना।
हम सब बरसाती भेक, सदा टर्राते,
तुम रहो उछलते टोड, तुम्हें बस चलना।
मूषक के ऊपर हाथ, हमारा रहता,
रख दें तुमको जिस मोड, तुम्हें बस चलना।
खाने-पीने का काम , हमारा होता,
तुम तो बस एक कमोड, तुम्हें बस चलना।
कंधों पर भारी भार, हमारे रहता,
हम उठा रहे सब लोड, तुम्हें बस चलना।
रख 'शुभम्' वोट की लाज,एक जुट होना,
हम देंगे हाथ मरोड, तुम्हें बस चलना।।
शुभमस्तु,
29.09.2026◆2.00प०मा०
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