सोमवार, 28 सितंबर 2026

सत्य यही जब [ सजल ]

 311/2026


    

समांत          : अले

पदांत            : अपदांत

मात्राभार       :  14.

मात्रा पतन     :शून्य


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


खोल       भुजाएँ     मिले   गले।

सत्य   यही   जब   उर   पिघले।।


दुनिया  में   छल - छद्म     बढ़ा।

उल्लू     सीधा   किया      चले।।


नहीं     समझना     अपना-सा।

सभी   नहीं    नर-नारि     भले।।


नजदीकी      में        देवी      वे।

गए    दूर     तो     बड़े     खले।।


सोच-समझकर     करनी   कर।

मनुज    अन्यथा   हाथ     मले।।


सड़क  नहीं      सीधी    दुनिया।

पता   नहीं   कब   कौन    छले।।


'शुभम्'  दूध     से   जल    जाए।

रखे    फूँक   निज   पाँव - तले।।


शुभमस्तु,


27.09.2026◆10.30 प०मा०

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