सोमवार, 28 सितंबर 2026

ये ख़्वाब मेरा [ गीतिका ]

 313/2026


           


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


देश   की  सेवा  करूँ, ये  ख्वाव   मेरा।

मुफ़्त की   मेवा चरूँ,ये   ख्वाव    मेरा।।


वेश  की  पूजा  यहाँ   होती   बड़ी   ही,

नाव  को  खेवा  करूँ, ये  ख्वाव    मेरा।


धर्म की चादर तले   कुछ   भी करूँ  मैं ,

मालिका  फेरा  करूँ,  ये   ख्वाव   मेरा।


जाकर सियासत की सड़क चौड़ी अनोखी,

नाम   निज  पैदा  करूँ, ये  ख्वाव  मेरा।


नारी   बिना होती  सफलता  भी न कोई,

सहभतृका   बेवा  करूँ, ये  ख्वाव   मेरा।


बगुला  भगत की भक्ति  का  डंका बजाऊँ,

रस   भरी    शेवा   करूँ, ये  ख्वाव   मेरा।


ऐ  'शुभम्'  कुछ  और  ही  है  सोच अपनी,

वचन का   केवा   करूँ,  ये    ख्वाव  मेरा।


शुभमस्तु,

28.09.2026◆9.30आ०मा०

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