294/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
त्योहारों का देश है, भारतवर्ष महान।
दीवाली होली सदा, विजयादशमी शान।।
गुजराती बँगला कई, भाषाओं की धूम,
सर्वश्रेष्ठ हिंदी सदा, करता जग गुणगान।
राम कृष्ण प्रकटे यहाँ,यही बुद्ध का देश,
तुलसी सूर कबीर के,अमर नाम का मान।
सरस्वती गंगा यहीं, सरयू यमुना धार,
पावन करतीं हैं धरा,भारत की पहचान।
हिंदू सिख मुस्लिम सभी,रहते मिलकर एक,
भारत के रणबाँकुरे,सुगठित सुखद वितान।
धर्म सनातन देश में, सरसाए नित भव्य,
कर्ण वीर रणधीर का, सदा अमर है दान।
'शुभम्' बड़ा सौभाग्य है, जन्मा मैं इस देश,
कागज पर मसि लेखनी,चलती नित्य विहान।
शुभमस्तु,
21.09.2026◆7.30 आ०मा०
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