365/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
आचरण मैला
तुम्हारा
खाल को क्या रंग देना ?
शक्ल पोती
देवियों-सी
कर्कशा के बोल खारी
चाहती
पुजना पुरुष से
मर्द पर अतिचार भारी
नीले ड्रमों में
पैक कोई
गेह में हुड़दंग देना।
देवियों -सी
मूर्ति तेरी
किंतु भीतर कालिमा है
छोड़ प्रीतम
देहरी को
प्रेमियों से लालिमा है
त्याग दी
संतति जनी जो
सिर्फ़ छ:-छः अंड सेना।
नापने का
नारियों को
एक भी मीटर बना क्या?
मर्म से
बहिरंग की
होती कभी है तोलनी क्या?
दोनों चलाते
नाव घर की
पतवार ले कर संग खेना।
शुभमस्तु,
23.10.2026◆1.00 प०मा०
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