358/ 2026
समांत : आर
पदांत :अपदांत
मात्राभार : 15
मात्रा पतन : शून्य
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
करते हैं जिनसे हम प्यार।
वही करें हमसे तकरार।।
नेकी कर दरिया में फेंक।
क्यों प्रतिशोधक करना वार!!
वृश्चिक नहीं भूलता दंश।
विष करता है आरम्पार।।
कॉकरोच यदि पलटे देह।
पुनः उलट क्यों हो तैयार।।
नाल ठुकाने बनी-ठनी।
चली मेंढकी टपकी लार।।
नेतागीरी चली कभी न।
मच्छर मक्खी हैं बेजार।।
'शुभम्' छाजता कर्म प्रवीण।
रहे अन्यथा वह लाचार।।
शुभमस्तु,
19.10.2026◆9.30 आ०
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