364/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
खुदा के
खेल में
खलल डाला है तुमने।
देह की
दीवार का
रँग बदल डाला
बदल डाली है
त्वचा
रंग था जो काला!
कमी पाई है
सृजन में
सिफर डाला है तुमने।
भैंस तो है
भैंस
क्या वह गाय होगी!
माँगता हो
भीख
फिर होगा न योगी
पूतना के
कर्म को
संभलवाया है तुमने।
ये लिपस्टिक
क्रीम की
जादूगरी है
है सफाई
हाथ की
बाज़ीगरी है
पार्लर के
भाग्य को
बदल डाला है तुमने।
कष्ट था
इस रूप-रँग से
बोल देतीं
गर्दभी सित
रंग दें
यह खोल देतीं
जिंदगी में
आप ही
गरल डाला है तुमने।
शक्तिरूपा
नाम है
अबला कहें क्यों
प्रतिमा
विरोधाभास की
नारी सहे क्यों
तुम पहेली
बन गई खुद
उगल डाला है तुमने।
शुभमस्तु,
23.10.2026◆10.45 आ०मा०
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