सोमवार, 12 जनवरी 2026

हे मृगनयनी!सँवरो [ सजल ]

 015/2026


    

समांत          : अट

पदांत           : तुम

मात्राभार      : 16.

मात्रा पतन    :शून्य।


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


दूर  न     फेंको    अपनी  लट  तुम।

हे   मृगनयनी!   सँवरो   झट  तुम।।


करो न   जलदी   जल    भरने  की।

कटि तट रखो सँभलकर घट तुम।।


पदचल    भंग    हुई    मत   घबरा।

करने दो    उसको   फटफट   तुम।।


ध्यान  धरो मन में   निज  प्रिय का।

राधे-राधे    पथ    में    रट      तुम।।


यद्यपि  थक   कर   चूर    हुई    हो।

रुको राह में    सघनित   वट   तुम।।


कदम   बढ़ाओ      अपने      धीमे।

करो नहीं यों  पद  खट -खट  तुम।।


'शुभम्'  सुझाव   दे   रहा    उत्तम।

उसे मान लो अब    झटपट   तुम।।


शुभमस्तु !


05.01.2026◆2.45आ०मा०

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