015/2026
समांत : अट
पदांत : तुम
मात्राभार : 16.
मात्रा पतन :शून्य।
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
दूर न फेंको अपनी लट तुम।
हे मृगनयनी! सँवरो झट तुम।।
करो न जलदी जल भरने की।
कटि तट रखो सँभलकर घट तुम।।
पदचल भंग हुई मत घबरा।
करने दो उसको फटफट तुम।।
ध्यान धरो मन में निज प्रिय का।
राधे-राधे पथ में रट तुम।।
यद्यपि थक कर चूर हुई हो।
रुको राह में सघनित वट तुम।।
कदम बढ़ाओ अपने धीमे।
करो नहीं यों पद खट -खट तुम।।
'शुभम्' सुझाव दे रहा उत्तम।
उसे मान लो अब झटपट तुम।।
शुभमस्तु !
05.01.2026◆2.45आ०मा०
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