039/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
माघ मास
शुभ कल्पवास में
नहा त्रिवेणी मैं आया।
गंगाजल का
वाष्प सुपावन
छाया ऊपर अंबर में
धुँधलापन
नभ में छाया है
नहीं किया आडंबर मैं
जैसे ही
मैं दिनकर ऊपर
अपने को चढ़ता पाया।
धनु से
मकर राशि में मेरा
हुआ संक्रमण जिस दिन से
संक्रांति कहलाती
शुभता भरी हुई है छिन-छिन से
शीत और
कमतर अब होगा
मेरा धूपित रूप लुभाया।
सहन नहीं
कर पाए धरती
रूप तेज से भरा हुआ
इसीलिए मैं
भानु दूध की
चादर ओढ़े खड़ा हुआ
देखो कैसा
खग वृन्दों ने
स्वागत में नवगीत सुनाया।
शुभमस्तु !
20.01.2026◆ 7.45 आ०मा०
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