गुरुवार, 15 जनवरी 2026

जाति का घण्टा [ नवगीत ]

 033/2026


       

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


जाति का घण्टा

बजाते 

फिर रहे हैं।


भाल पर

बैनर लिखा

देखा न कोई

उच्चता

या निम्नता 

का रंग कोई

भंगता की

भंगिमा में 

घिर रहे हैं।


हर कर्म में

सब लिप्त हैं

फिर जाति कैसी

दुर धर्म में

संल्पित हैं

है जाति वैसी

जन्मना 

क्यों उच्च वे

जो गिर रहे हैं।


नग्न आया

नग्न जाए

एक ही पथ

द्वार सबका

एक ही है

एक ही रथ

मुड़फुटौवल में

मनुज क्यों

चिर रहे हैं।


शुभमस्तु !


15.01.2026◆ 2.30प०मा०

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