रविवार, 4 जनवरी 2026

छोटे दिन की लंबी रातें [ बालगीत ]

 013/2026


           

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


छोटे    दिन       की    लंबी    रातें।

सुनें    कहानी   रस    की     बातें।।


शिशिर  कर रही   सी-सी   सी-सी।

दिन के  सँग    रातें      गीली- सी।।

सर्द   हवाओं      की     हैं     घातें।

छोटे  दिन        की     लंबी    रातें।।


पूस-माघ     के     दिन    हैं   छोटे।

प्रिय  लगते    कपड़े    जो     मोटे।।

ऊनी     की      रुचिकर     सौगातें।

छोटे  दिन   की        लंबी      रातें।।


जला  अलाव     तापना   भाता।

पीना  खाना   गरम      सुहाता।।

हुईं    कुहासे     की      बरसातें।

छोटे  दिन    की    लंबी     रातें।।


गज़क  रेवड़ी   के     दिन  आए।

भून शकरकंदी      हम    खाए।।

तकली  थाम  सूत    हम   कातें।

छोटे दिन    की    लंबी      रातें।।


दिन  में    सूरज     रात   न    तारे।

भाप    छोड़ते     नदी      किनारे।।

माघ  मास     की     आई     सातें।

छोटे    दिन    की   लंबी      रातें।।


शुभमस्तु !


04.01.2026◆ 1.15 प०मा०

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