001/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
स्वागत है नववर्ष का ,दो हजार छब्बीस।
जगती का कल्याण हो,विदा हुआ पच्चीस।।
मंगलमय नववर्ष हो, करें अहं को चूर।
हर्ष और उत्कर्ष का, उद्भव हो भरपूर।।
नए वर्ष में देश का ,बढ़े प्रगति का मान।
गबन मिलावट मुक्त हो,कृपा करें भगवान।।
नर -नारी नववर्ष में, करें न ऐसे काम।
जिनसे जगत समाज में ,होते हों बदनाम।।
स्वस्थ रहें जन जीव सब,करें नित्य उत्कर्ष।
हो नववर्ष विकास का,सहज मान सह हर्ष।।
पले सपोले देश की,छाती पर जो भार।
करें पलायन शीघ्र ही, खुले हुए हैं द्वार।।
जनता शोषण मुक्त हो,प्राप्त करें सदबुद्धि।
नेतागण इस देश के, वर्धित हो समृद्धि।।
सैनिक सीमा पर खड़ा,साहस से पग रोप।
रक्षक हो इस देश का,बढ़े नित्य ही ओप।।
नए वर्ष में मानवी,रुचि का हो उत्कर्ष।
निंदनीय करना नहीं,बढ़े सदा उर हर्ष।।
नया वर्ष समृद्धि का, मानक बने महान।
भारत माँ का पूत नित,कृषक बने धनवान।।
नव पीढ़ी नववर्ष में, ग्रहण करे नव रूप।
हँसीखुशी बालक रहें, खिले नेह की धूप।।
शुभमस्तु !
01.01.2026◆6.45 आरोहणम मार्तण्डस्य।
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