032/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
हर अक्षर की
एक संगिनी
आजीवन साथ निभाए।
अक्षर अक्षर
भाषा बनती
मात्रा का ले साथ
दक्षिण कभी
वाम होती है
कभी सुशोभित माथ
पड़े ज़रूरत
यदि अक्षर को
तो पाँवों तर जाए।
अक्षर शब्द
व्यवस्थित क्रम में
बड़े वाक्य बन जाते
मिले वाक्य से
वाक्य निरंतर
कवि सौंदर्य सजाते
बन्ध कहें
या परिच्छेद वे
कविता लेख सजाए।
नहीं एक मात्रा से
चलता
मूढ़ जनों का काम
एकाधिक को
संग सुलाते
भले बनें बदनाम
अक्षर से ले सीख
अगर नर
एक संतुलन आए।
शुभमस्तु !
15.01.2026◆1.30प०मा०
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