सोमवार, 19 जनवरी 2026

लोग [ चौपाई ]

 037/2026


    


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


लोग  करें    सब  अपनी    बातें।

कहें    दिवस  को      काली   रातें।।

जिसके  मन    में    जो  भी  आए।

अपने  मन     से     बात     बनाए।।


लोग  करें  सब   बात  न  नीकी।

यद्यपि     चुपड़ी  हों  ज्यों   घी की।।

बँधे  स्वार्थ    में    लोग    यहाँ   के।

उन्हें  न    भावें  लोग     जहाँ    के।।


लोग   विषमता  के    सब  रोगी।

विषम सोच के    हैं   जन    भोगी।।

सोच  समझ   कर    निर्णय   लेना।

मन  की बात  न    इनको     देना।।


भले  प्राण भी    दे    दो      इनको।

लोग कहें निज    स्वारथ इसको।।

कितने  लोग  जगत    हित   सोचें।

सदा  अन्य     के     कपड़े    नोचें।।


जनहित  का   है   बहुत     दिखावा।

यद्यपि  मन में     कुटिल     दुरावा।।

छद्म   एकता   लोग       दिखाते।

बँटे  खण्ड   में     नित   बिखराते।।


लोग  जगत   के  भले   नहीं   हैं।

पर    लाखों    में   चार   कहीं   हैं।।

मुख   में  राम  बगल    में    छुरियाँ।

नित्य   बदलते   अपनी      दुनिया।।


'शुभम्'    सहारा      इनका    लेना।

पाँव  कुल्हाड़ी    में    खुद     देना।।

लोग  अपावन    मन    से  भारी।

कैसे  खिले   जगत    की   क्यारी।।


शुभमस्तु !


19.01.2026◆7.15 आ०मा०

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