017/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
जपें नाम झट राधा -राधा।
कटें ओघ फट राधा - राधा।।
मिलते हैं घनश्याम वहाँ पर,
जहाँ भक्त - रट राधा -राधा।
एक नाम सब संकटहर्ता,
यमुना के तट राधा -राधा।
कुंज करील हरित आम्राली,
सघन छाँव वट राधा- राधा।
निबटत सकल जगत की चिंता,
मिटा सभी खट राधा-राधा।
और किसी की क्या बतलाएँ,
जपे श्याम नट राधा -राधा।
'शुभम्' सहारा एक जगत में,
मिटते संकट राधा- राधा।
शुभमस्तु !
05.01.2026◆3.45आ०मा०
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