गुरुवार, 1 जनवरी 2026

स्वागत है नववर्ष का [ सोरठा ]

 002/2026




©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


दो   हजार छब्बीस,   स्वागत   है  नववर्ष   का।

विदा   हुआ  पच्चीस,  जगती  का कल्याण हो।।

करें    अहं     को    चूर,  मंगलमय   नववर्ष  हो।

उद्भव    हो   भरपूर,  हर्ष   और  उत्कर्ष   का।।


बढ़े प्रगति   का   मान,  नए  वर्ष  में देश का।

कृपा   करें भगवान,गबन   मिलावट मुक्त हो।।

करें  न   ऐसे   काम,   नर-नारी  नववर्ष में।

होते हों बदनाम,  जिनसे   जगत समाज में।।


करें नित्य उत्कर्ष,स्वस्थ रहें   जन जीव  सब।

सहज मान सह हर्ष,हो नववर्ष विकास  का।।

छाती   पर  जो  भार, पले सपोले   देश की।

खुले   हुए  हैं  द्वार, करें पलायन   शीघ्र  ही।।


प्राप्त करें सद बुद्धि, जनता शोषण मुक्त हो।

वर्धित हो समृद्धि,   नेतागण    इस   देश के।।

साहस से पग रोप,सैनिक सीमा पर खड़ा।

बढ़े   नित्य   ही ओप,रक्षक हो इस देश का।।


रुचि   का   हो  उत्कर्ष,नए  वर्ष  में मानवी।

बढ़े सदा  उत्कर्ष,  निंदनीय   करना नहीं।।

मानक   बने  महान,  नया वर्ष  समृद्धि का।

कृषक बने धनवान,  भारत माँ का पूत नित।


ग्रहण   करे  नव रूप,नव पीढ़ी   नव हर्ष में।

खिले नेह   की   धूप,हँसीखुशी   बालक रहें।।


शुभमस्तु !


01.01.2026◆6.45 आरोहणम मार्तण्डस्य।

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