शनिवार, 3 जनवरी 2026

अतीत की नींव और आज [ अतुकान्तिका ]

 005/2026


     

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


अतीत की नींव पर

खड़ा है वर्तमान,

बीता हुआ कल

है आज का आधार,

कर के देखो तो विचार।


जनक है अतीत 

आज के आज का,

कल वह अतीत ही था

जिसे अपने अस्तित्व पर

बड़ा नाज था।


उपेक्षणीय नहीं है

बीता हुआ कल,

दुःख हो या सुख हो

उसे रहना है अटल,

वही तो नव्य सत्त्व है।


जनक और जननी

सभी अविस्मरणीय हैं,

करो भी तुम वही

जो करणीय है,

ठुकराना नहीं

भुलाना नहीं

उनसे छुटकारा नहीं।


पच्चीस गया तो

आ गया है छब्बीस,

अगले वर्ष आएगा

सत्ताईस,

यही क्रम 

आगे भी बढ़ेगा

और ऊपर चढ़ेगा।


आप और हम भी बढ़ें

और-और  ऊपर चढ़ें

नए-नए प्रतिमान गढ़ें

न किसी की प्रगति से चिढ़ें,

यही जीवन का क्रम है

अस्तित्व का मर्म है

अनिवार्य धर्म है।


शुभमस्तु !


02.01.2026 ◆7.00आ०मा०

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