रविवार, 4 जनवरी 2026

नए वर्ष का नया सवेरा [ बालगीत ]

 012/2026




©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


नए    वर्ष    का     नया    सवेरा।

मिटा  गया   गत  सघन   अँधेरा।।


मास     जनवरी     पौष   महीना।

दूर  देह     से      हुआ    पसीना।।

भरा     कुहासा      नहीं    उजेरा।

नए  वर्ष     का     नया    सवेरा।।


पंख   फुला     पिड़कुलिया  बैठी।

ठंडक       से       गौरैया     ऐंठी।।

मुर्गा-मुर्गी          करते        फेरा।

नए  वर्ष    का     नया     सवेरा।।


छप्पर  में   माँ  छाछ   मथ   रही।

ठंड लगे जब    खाँय   हम  दही।।

पिता   कर्मरत    बने      कमेरा।।

नए  वर्ष     का    नया    सवेरा।।


गायें     भैंसें       रेंक      रही     हैं।

झाग  मुखों     से    फेंक   रही   हैं।।

लगा  धरा     पर     ढेर     अनेरा।।

नए  वर्ष      का    नया     सवेरा।।


मुख    सूरज    ने    चमकाया    है।

अंबर  में     बादल     छाया      है।।

'शुभम्'  चहूँ  दिशि    घिरता  घेरा।।

नए  वर्ष     का      नया      सवेरा।।


शुभमस्तु !


04.01.2026◆11.15आ०मा०

                     ◆◆◆

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...